JNV सरकारी स्कूल के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी को परमानेंट करो, हाई कोर्ट का आदेश

0
नई दिल्ली, 21 जनवरी 2026
: सरकारी स्कूलों में काम करने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए हाई कोर्ट से गुड न्यूज़ आई है। जवाहर नवोदय विद्यालय मामले में हाईकोर्ट ने स्कूल को आदेश दिया कि वह लंबे समय से कम कर रहे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी को परमानेंट करें। 

मामले की पृष्ठभूमि और विवाद की शुरुआत 

यह पूरा मामला 1993 में शुरू हुआ था, जब धनराज चौधरी को जेएनवी, नंदला (अजमेर) में एक मेस-हेल्पर के रूप में नियुक्त किया गया था। धनराज को मई 1996 में बिना किसी पूर्व नोटिस या मुआवजे के नौकरी से निकाल दिया गया था, जिसे उन्होंने 'औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947' की धारा 25F का उल्लंघन बताते हुए लेबर कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी तरह का एक अन्य मामला अमर सिंह का भी था। लेबर कोर्ट का फैसला और जेएनवी की चुनौती वर्ष 2001 में, लेबर कोर्ट ने श्रमिकों के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें सेवा में निरंतरता और पिछले वेतन (backwages) के साथ बहाल करने का आदेश दिया। 

स्कूल में हाई कोर्ट में अपील की फिर हाई कोर्ट के आदेश की अवमानना भी की

लेकिन, स्कूल प्रशासन ने इस फैसले को राजस्थान उच्च न्यायालय में चुनौती दी और तर्क दिया कि एक स्कूल 'उद्योग' (industry) की श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए उन पर औद्योगिक कानून लागू नहीं होने चाहिए। प्रशासन की 'दुर्भावनापूर्ण' कार्रवाई उस समय प्रकट हुई जब 2008 में उच्च न्यायालय ने स्कूल को निर्देश दिया कि वह इन श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करे। इस वित्तीय देनदारी से बचने के लिए, स्कूल प्रशासन ने मार्च 2009 में मनमाने ढंग से श्रमिकों की सेवाएं फिर से समाप्त कर दीं। उच्च न्यायालय ने इस कार्रवाई को "दुर्भावनापूर्ण" और "अदालती प्रक्रिया की अवमानना" माना, क्योंकि यह कार्रवाई अदालत की अनुमति के बिना की गई थी। 

उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला 

माननीय न्यायाधीश आनंद शर्मा ने इस मामले पर अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु रखे:
• स्कूल एक 'उद्योग' है: अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा होने वाले अन्य कार्य उसे 'उद्योग' की श्रेणी में लाते हैं।
• नियमितीकरण का आदेश: अदालत ने पाया कि ये श्रमिक पिछले 32 वर्षों से अधिक समय से निरंतर सेवा दे रहे हैं और मेस-हेल्पर का पद एक स्वीकृत पद है।
• श्रमिकों के अधिकार: अदालत ने 31 मार्च 2009 के बर्खास्तगी आदेशों को रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि इन श्रमिकों की सेवाओं को उनके 10 साल की सेवा पूरी होने की तारीख से नियमित (regularize) किया जाए।

निष्कर्ष और आदेश का क्रियान्वयन 

अदालत ने जेएनवी प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि तीन महीने के भीतर नियमितीकरण की यह प्रक्रिया पूरी की जाए और श्रमिकों को उनकी वरिष्ठता, पेंशन और वेतन निर्धारण जैसे सभी लाभ दिए जाएं। यह फैसला उन सभी कर्मचारियों के लिए एक मिसाल है जो लंबे समय से अस्थायी पदों पर रहकर शोषण का शिकार हो रहे हैं।
भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
फेसबुक पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289

Post a Comment

0 Comments

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!