भोपाल समाचार, 21 जनवरी 2026: भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और अशोकनगर जिले के कलेक्टर श्री आदित्य सिंह को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सोशल मीडिया पर कलेक्टर के समर्थन में प्रदर्शन शुरू हो गया है। सिर्फ इतना ही नहीं है, सोशल मीडिया पर व्यक्त किए जा रहे समर्थन के आधार पर मैन स्ट्रीम मीडिया द्वारा समाचार भी प्रकाशित किया जा रहे हैं। कुल मिलाकर एक कैंपेन शुरू हुआ है, जो यह प्रश्न उपस्थित करता है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री आदित्य सिंह, अशोकनगर के कलेक्टर है या अशोक नगर के नेता?
मामला क्या है, अशोक नगर कलेक्टर के समर्थन में प्रदर्शन क्यों?
कुछ दिनों पहले एक खबर आई थी जिसमें यह बताया गया था कि आनंदपुर धाम ट्रस्ट वालों ने मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव और प्रधानमंत्री के कार्यालय में श्री आदित्य सिंह की शिकायत की है। शिकायत में उन्होंने बताया कि श्री आदित्य सिंह ने ट्रस्ट की प्रॉपर्टी के नामांतरण के मामले में 3 करोड रुपए की रिश्वत मांगी। बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पैसा उनको नहीं बल्कि पार्टी को चाहिए। मीडिया ट्रायल के दौरान एक खबर यह भी आई, श्री आदित्य सिंह को अशोकनगर कलेक्टर के पद से हटाया जा सकता है।
इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने श्री आदित्य सिंह के समर्थन में पोस्टिंग शुरू कर दी। हालांकि ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा नहीं है लेकिन बात बड़ी तब हो गई जब मैन स्ट्रीम मीडिया ने इस प्रकार की खबरों का प्रसारण शुरू कर दिया मानो अशोकनगर की जनता कलेक्टर के समर्थन में सड़कों पर उतरने के लिए तैयार है। यदि कलेक्टर का ट्रांसफर हुआ तो अशोकनगर की जनता डॉ मोहन यादव सरकार से नाराज हो जाएगी और स्थानीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से रूठ जाएगी।
IAS आदित्य सिंह का ऑनलाइन ऑडिट
सच्चाई पता करना मुख्य सचिव का काम है और वह ऐसे काम में काफी सक्षम भी है लेकिन बात जब सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के बीच में आ गई है तो फिर एक ऑनलाइन ऑडिट तो बनता है। हमने जानने का प्रयास किया की कहानी क्या है और कहानी के पीछे क्या है। हमको जो पता चला वह इस प्रकार है:-
श्री आदित्य सिंह UPSC 2014 के टॉपर हैं। प्रथम प्रयास में ही ऑल इंडिया रैंक 47 हासिल की। इंटरव्यू में 208 अंक प्राप्त किए।
- श्री आदित्य सिंह मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रहने वाले हैं।
- श्री आदित्य सिंह के पिता डॉक्टर अतुल सिंह रीवा में के मेडिकल ऑफिसर थे।
- श्री आदित्य सिंह ने कक्षा 10 तक की पढ़ाई रीवा से की उसके बाद DAV स्कूल, कोटा (राजस्थान) से 11वीं और 12वीं की पढ़ाई की।
- श्री आदित्य सिंह शुरू से ही पढ़ाई में अच्छे थे इसलिए IIT रुड़की से B.Tech (Paper Technology) (2008-2012) डिग्री प्राप्त की और UPSC की तैयारी दिल्ली से की।
श्री आदित्य सिंह की हरदा कलेक्टर कार्यकाल
श्री आदित्य सिंह फरवरी 2024 से अप्रैल 2025 तक हरदा में कलेक्टर के पद पर रहे। यह उनकी पहली पोस्टिंग थी लेकिन अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए।
हरदा में वह अक्सर पैदल दौरे पर निकल जाते थे और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की करते थे।
सड़क पर अस्थाई अतिक्रमण हटाने का काम सामान्य तौर पर ट्रैफिक पुलिस करती है लेकिन कलेक्टर होते हुए श्री आदित्य सिंह भी यही काम करते थे।
हरदा में श्री आदित्य सिंह का सबसे चर्चित मामला "गंगेश्री मठ (गोंदागांव) का मामला" है।
गंगेश्री मठ (गोंदागांव) का मामला करीब 400 एकड़ की जमीन का मामला था।
इसके अलावा और भी कई सारी कार्रवाई की गई लेकिन ज्यादातर चर्चित मामले सरकारी या प्राइवेट प्रॉपर्टी से जुड़े हुए थे।
कंक्लुजन नंबर 1: यदि पहली नजर में देखा जाए तो अच्छा लगता है कि एक कलेक्टर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करता है। और जमीनों से जुड़े 400 साल पुराने मामले भी सॉल्व कर देता है। लेकिन यदि चश्मा बदल जाए तो कुछ और भी दिखाई देता है। सवाल तो उठाता है कि क्या सब कुछ निष्पक्षता के साथ किया जा रहा है। क्या अतिक्रमण के खिलाफ एक किनारे से सीधी कार्रवाई चल रही है या फिर चुने हुए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई होती है ताकि आसपास के लोगों में दहशत बनी रहे।
डाउट नंबर 1: कहीं ऐसा तो नहीं की हरदा के गंगेश्री मठ के कारण कॉन्फिडेंस हाई हो गया हो और यह विचार किए बिना की आनंदपुर धाम वालों का कनेक्शन पार्टी हाई कमान से है....।
सच्चाई जो भी हो लेकिन जांच होनी चाहिए और आनंदपुर धाम या आदित्य सिंह, दोनों में से जो भी गलत है उसके खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए। इस मामले को यदि अधूरा छोड़ दिया गया तो आनंदपुर धाम और आदित्य सिंह दोनों की इमेज पर हमेशा डाउट बना रहेगा।
मैसेज नंबर-1: कलेक्टर अपने समर्थन में प्रदर्शन करवा रहे हैं?
इस मामले में एक सवाल यह भी है कि क्या जिले का कलेक्टर अब सोशल मीडिया से डिसाइड होगा। यदि मुख्य सचिव किसी IAS को कलेक्टर बनाकर भेज रहे हैं तो यह मान लिया जाना चाहिए कि वह ईमानदार है। यदि उसके दामन पर दाग होता तो उसको कलेक्टर नहीं बनाया जाता। यदि आदित्य सिंह ने हरदा में गड़बड़ की होती तो वह अशोकनगर के कलेक्टर नहीं बनते। इसी प्रकार अशोकनगर में जो भी नया कलेक्टर आएगा, वह भी दागी नहीं होगा। कलेक्टर कौन होगा इसका निर्धारण मुख्य सचिव करते हैं। सोशल मीडिया पर और मुख्य धारा की मीडिया में जिस तरह के समाचार चल रहे हैं, इसका सिर्फ एक मैसेज होता है। कलेक्टर अपने समर्थन में प्रदर्शन करवा रहे हैं।
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