भोपाल, 19 जनवरी 2026 - नर्मदा क्षेत्र की राजनीति करने वाले एक नेता ने आज भोपाल में प्रेस कांफ्रेंस करके ग्वालियर संभाग में वर्षों से संचालित एक सेवा धाम के संचालकों पर बाद गंभीर आरोप लगाया गया है। इसमें मध्य प्रदेश के तीन आईएएस अधिकारियों के नाम भी लिए गए हैं। मामले की जांच होनी चाहिए लेकिन हम इस समाचार में किसी भी पक्ष का नाम प्रकाशित नहीं कर रहे हैं क्योंकि प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जो वीडियो जारी किए गए हैं वह अब तक प्रमाणित नहीं हुए हैं। यह भी बताया गया है की वीडियो एक साल पुराने हैं। इसका दूसरा मतलब यह भी होता है कि पिछले 1 साल से इस वीडियो के बदले कोई डील करने की कोशिश की जा रही थी। सफलता नहीं मिला इसलिए प्रेशर क्रिएट करने हेतु प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई।
सेवा के लिए संचालित ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए गए
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया गया है कि एक धर्म विशेष के माध्यम से संचालित इस सेवा धाम में पिछले कई सालों से अवैध गतिविधियों का संचालन हो रहा है। यहां युवकों का शोषण किया जा रहा है। देह व्यापार का संगठित रैकेट चल रहा है। इसके वीडियो साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। ट्रस्ट की सालाना कमाई लगभग 800 करोड़ रुपए है। लेकिन इसका कोई हिसाब-किताब नहीं रखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के तीन आईएएस ऑफिसर यहां आते-जाते रहते हैं बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद किया जा रहा है।
सिर्फ पांच वीडियो जारी किए गए
संबंधित नेता ने दावा किया था कि, आरोपी को साबित करने के लिए उसके पास पर्याप्त संख्या में वीडियो एविडेंस है। लेकिन सिर्फ पांच वीडियो जारी किए गए। इसमें से तीन वीडियो आपत्तिजनक है लेकिन एक भी वीडियो तारीख एवं स्थान प्रमाणित नहीं करता है। शेष दो वीडियो में एक युवक और एक महिला आरोप लगाते हुए दिखाई दे रही है। कुल मिलाकर कोई भी वीडियो सनसनीखेज आरोप का पुख्ता प्रमाण नहीं कहा जा सकता।
एक साल से वीडियो का क्या कर रहे थे?
जारी किए गए सभी वीडियो 1 साल पुराने हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि नेताजी 1 साल से वीडियो लेकर क्या कर रहे थे। क्या वह ट्रस्ट के साथ कोई डील करना चाहते थे। जो नहीं हो पाई तो भोपाल में आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने लग गए।
प्रदेश अध्यक्ष ने मामला क्यों नहीं उठाया?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो आरोप लगाए गए हैं वह बड़े गंभीर है। प्रदेश अध्यक्ष ने कुछ दिनों पहले इस क्षेत्र के एक सरपंच पीड़ित युवक के लिए हंगामा मचा दिया था। फिर क्या कारण है कि इतने गंभीर मामले को प्रदेश अध्यक्ष ने नहीं उठाया। एक ऐसे नेता ने मामला उठाया जिसका कार्य क्षेत्र सीमित है। सवाल तो यह भी बनता है कि क्या यह मामला नेताजी के क्षेत्राधिकार में आता है?
मामला गंभीर, दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए
यह मामला बेहद गंभीर है और सरकार को इस मामले की जांच करवानी चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो भी और यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो भी, कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि ट्रस्ट में कुछ गलत हो रहा है तो उसको अभी और इसी समय रोक देना जरूरी है। यदि ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है तो, ऐसे तत्वों को अभी और इसी समय रोक देना जरूरी है। उन तीनों आईएएस अधिकारियों को भी मामला संज्ञान में लेना चाहिए। यदि वह खुद को निर्दोष साबित नहीं करते हैं तो यह आरोप, उनको हमेशा एक संदिग्ध अधिकारी बनाए रखेगा।
डिस्क्लेमर:- मामला गंभीर है इसलिए हमने किसी भी पक्ष के नाम का प्रकाशन नहीं किया है। यदि सरकार जांच करवाती है और जांच रिपोर्ट में कोई दूसरी पाया जाता है तो हम सभी पक्षों के नाम का खुलासा करेंगे। यदि पीड़ित पक्ष की ओर से कोई पुख्ता एविडेंस दिया जाता है तो भी सभी पक्षों का खुलासा किया जा सकता है।
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