मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों को लेकर विधानसभा में क्या फैसला हुआ, A2Z पूरी रिपोर्ट पढ़िए

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 1 मार्च 2026
: भारत के नागरिकों के लिए लोकसभा और विधानसभा हमेशा ही महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन बजट सत्र सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। यह आपकी जिंदगी को सीधे प्रभावित करता है और बजट सत्र से ही पता चलता है कि सरकार ने एक्चुअल में आपके लिए क्या प्लानिंग की है। इस न्यूज़ आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि मध्य प्रदेश विधानसभा के हाल ही में संपन्न हुए बजट सत्र में सरकारी नौकरियों को लेकर क्या बातचीत हुई और क्या फैसला हुए।

मुख्यमंत्री ने उपलब्धियों का ब्योरा सदन में रखा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में सरकार ने पिछले तीन वर्षों से लंबित पीएससी (PSC) भर्ती को नियमित किया और लगभग 50,000 सरकारी पदों को भरकर अपना वादा निभाया। इसके अतिरिक्त, लगभग 40,000 अन्य पद विज्ञापित किए जा रहे हैं।
पुलिस विभाग में वर्षों से खाली पड़े निरीक्षकों के पदों और अन्य संवर्गों में भर्ती शुरू की गई है। सरकार ने पुलिस विभाग में 22,500 नए पदों पर भर्ती का निर्णय लिया है, जिसमें अकेले वर्ष 2026 में 8,500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है।
बिजली विभाग में 50,000 पद और स्वास्थ्य क्षेत्र में 42,000 पद मंजूर किए गए हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग में 15,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रियाधीन है।

विपक्ष ने इन मुद्दों पर सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश के पोर्टल पर 22 लाख "आकांक्षी युवा" (बेरोजगार) पंजीकृत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन युवाओं को वास्तविक नौकरी कब और कैसे मिलेगी, क्योंकि वर्तमान में कई पढ़े-लिखे स्नातक युवा जोमेटो जैसे डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर काम करने को मजबूर हैं।

विधायक हेमंत कटारे ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय 'बैकडोर एंट्री' के जरिए 70-74 वर्ष के सेवानिवृत्त अधिकारियों को संविदा पर नियुक्त कर रही है। उन्होंने सदन में कुछ नाम (जैसे एस.एन. चौरसिया और जे.पी.एस. अरोरा) भी गिनाए। 

विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत नौकरी देने की नहीं है, क्योंकि उन्होंने 13% ओबीसी आरक्षण को "होल्ड" कर रखा है, जिससे भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। सरकार ने जवाब दिया कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण 87:13 के फॉर्मूले पर परिणाम घोषित किए जा रहे हैं।

सदन में यह मुद्दा भी उठा कि प्रदेश में 2 लाख से अधिक बैकलॉग पद खाली हैं, जिन्हें भरने के लिए सरकार कोई सक्रिय कदम नहीं उठा रही है।

सदन में यह जानकारी सामने आई कि पिछले 5 वर्षों में प्रदेश में लगभग 5,096 सूक्ष्म और लघु उद्योग (MSME) इकाइयां बंद हो गई हैं, जो रोजगार का बड़ा स्रोत थीं। 

आउटसोर्सिंग और अतिथि शिक्षकों की समस्याएं

विपक्ष ने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा कर्मचारियों से 50-50 हजार रुपये की अवैध वसूली की जा रही है और उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है।
अतिथि शिक्षकों को नियमित करने की मांग पर सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, हालांकि नियमित भर्ती में उन्हें 50% आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। 

What Decision Did the Madhya Pradesh Assembly Take on Government Jobs? Full Report

निष्कर्ष:  इस प्रकार स्पष्ट हुआ कि साल 2026 में मध्य प्रदेश में सभी सरकारी विभागों में मिलाकर अधिकतम 105,500 पदों पर भर्ती होगी। संख्या इससे काम हो सकती है लेकिन इससे ज्यादा नहीं होगी। विधानसभा में आउटसोर्स कर्मचारी, अतिथि शिक्षक, संविदा कर्मचारी और ओबीसी आरक्षण को लेकर चर्चा तो हुई लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। विपक्षी पार्टी कांग्रेस, सरकारी नौकरी के मुद्दे पर, सरकार पर दबाव बनाने में सफल नहीं हुई। सरकार ने जो डिसीजन लिया था, वही कायम रहा।
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