पीएम से सवाल करने वाले सीएम बताएं, रिलायंस से उनका रिश्ता क्या है

shailendra gupta
भोपाल। कोलब्लॉक आवंटन में फंसी कांग्रेस के पीएम मनमोहन सिंह के पास भले ही कोई प्रतिक्रिया ना हो परंतु मध्यप्रदेश के नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह के पास एक अस्त्र था जो आज उन्होंने सीएम शिवराज पर छोड़ दिया। उन्होंने पीएम से सवाल करने वाले सीएम से पूछा है कि रिलायंस से उनका रिश्ता क्या है।

आज जारी एक प्रेसबयान में नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह ने कोल ब्लाक आवंटन के मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कठघरें में खड़ा करते हुए कहा कि अगर वे इसे भ्रष्टाचार मानते है तो सबसे पहले उन पर कार्यवाहीं होना चाहिए क्योंकि 2008 चुनाव के ठीक पहले उन्होंने उद्योग विशेष को महान कोल ब्लाक आवंटन की सिफारिशी चिट्ठी प्रधानमंत्री को लिखी थी।

श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दूसरो पर उंगली उठाने के पहले अपने गिरेबान में भी झांके तो पाएंगे कि प्र्रदेश को भ्रष्टाचार की खदान बनाने के वे प्रमुख दोषी है। श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उद्योग विशेष को कोल ब्लाक आवंटन के बारे में प्रधानमंत्री को जो सिफारिशी पत्र लिखा था क्या इसके लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पहले यह देखना चाहिए कि वे स्वयं कितने नैतिक है। पिछले दस साल में प्रदेश को भ्रष्टाचार की गर्त में धकेल देने वाले शिवराज सिंह चौहान को इसका जवाब देना चाहिंए। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि वर्ष 2008 में चुनाव के ठीक पहले उद्योग विशेष के चितरंगी प्लांट को शासन प्रोजेक्ट का अतिशेष कोयला मिले इस संबंध में कौन सा समझौता हुआ था।

जब इस प्रोजेक्ट के लिए निविदाएं जारी की थी तो क्या अन्य उद्योग समूहों में यह जानकारी दी गई थी कि, उनका रिलायंस उद्योग समूह से अतिशेष कोयले को लेकर कोई समझौता हुआ हैं। श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बगैर आवेदन के कोल ब्लाक आवंटन के लिए जो सिफारिसी चिट्ठी लिखी उसका समय और नियत उनके खोट को उजागर करता है।

नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि चारों ओर अपने परिजनों के भ्रष्टाचार से घिरे शिवराज सिंह चौहान को सबसे पहले उन आरोपों का जवाब देना चाहिए जो उन पर लगे है। वे स्वयं पर और अपने मंत्रिमंडल के उन सदस्यों पर पहले एफआईआर दर्ज कराएं जिन पर पिछले दस साल से लोकायुक्त में प्रकरण विचाराधीन है और लोकायुक्त महोदय भी सरकार की अनुमति की प्रतीक्षा कर रहे है।

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