भोपाल। म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेष अध्यक्ष रमेष राठौर ने बताया कि महासंघ की बैठक में निर्णय लिया गया है कि म.प्र. के प्रत्येक जिले में जाने वाली मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा के समय संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के माता-पिता और बीवी-बच्चे, और रिष्तेदार मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान से पूछेगें कि हम लोग आपको आर्षिवाद (वोट) कैसे दें।
क्योंकि संविदा पर काम कर रहे हमारे बेटे - बेटियों ने आपके 9 वर्षो के कार्यकाल में दो लाख संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के लिए लगभग पांच सौ बार ज्ञापन सौंपा है, लेकिन आपने आज तक उनको नियमितीकरण का आशीर्वाद नहीं दिया। तो हम आपको आशीर्वाद (वोट) देकर अगली बार के लिए कैसे आपकी संविदा का नवीनीकरण कर दें। संविदा नौकरी नहीं है यह एक प्रकार से अधिकारियों की गुलामी है जिसमें प्रतिवर्ष संविदा बढ़ाने के नाम पर उच्च अधिकारी संविदा कर्मचारियों से एक माह का वेतन ले लेते हैं । संविदा कर्मचारियों के परिवार के लोग मुख्यमंत्री से पूछेगें कि आप म.प्र. के कैसे संवेदनशील मुख्यमंत्री हैं कि आपको वर्षो से पीड़ित, शोषित संविदा कर्मचारियों की पीड़ा दिखाई नहीं दे रही है और आपने अभी तक संविदा कर्मचारियों को नियमित नहीं किया है।
दूसरी और आपकी सरकार ने बिना किसी भर्ती प्रक्रिया के नियुक्त षिक्षाकर्मियों, पंचायत कर्मियों, गुरूजियों जिनकी नियुक्ति संरपचों, ग्राम समुदायों के द्वारा की गई थी, उनका मानदेय केन्द्र सरकार की परियोजनाओं से प्राप्त धनराषि से मिलता था, ऐसे षिक्षाकर्मियों, पंचायत कर्मियों, गुरूजियों को कैबिनेट में पदों का निर्माण कर नियमित दिया । वहीं विधिवत भर्ती प्रक्रिया, चयन प्रक्रिया, लिखित परीक्षा देकर आए संविदा कर्मचारियों जिनको नियुक्ति पत्र सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से प्राप्त हुये थे ।
ऐसे संविदा कर्मचारियों को आप नियमित क्यों नहीं कर रहे हैं । अब हम आपको किस आधार पर 2 लाख संविदा कर्मचारी और उनके परिवार के 15 सदस्य इस प्रकार 30 लाख लोगों का जन आर्षिवाद (वोट) आपको दें दें। इसलिए अब संविदा कर्मचारियों ने निर्णय लिया गया है कि दो लाख संविदा कर्मचारी तथा उनके परिवार के 15 सदस्य उस राजनैतिक पार्टी या उस सरकार को ही जनआर्षिवाद (वोट) के रूप में देगें जो संविदा कर्मचारियों को नियमित करेगी । इस बार सरकार संविदा कर्मचारियों के वोटो से ही बनेगी। क्योंकि म.प्र. में दो लाख संविदा कर्मचारी कार्य कर रहे हैं, संविदा कर्मचारियों तथा उनके परिवार के 15 सदस्यों को मिला लिया जाए तो संविदा कर्मचारियों और उनके परिवारों के वोटों की संख्या 30 लाख होती हैं। म.प्र. में कुल मतदाता 4 करोड़ 60 लाख हैं । लेकिन मतदान 70 प्रतिषत् ही होता है। इसलिए इस बार 3 करोड़ 22 लाख वोट मतपेटी में डाले जायेगें ।
संविदा कर्मचारियों के पास 30 लाख वोट हैं। जो कि 3 करोड़ 22 लाख वोटों का दस प्रतिषत हैं । वर्तमान में जिस राजनैतिक पार्टी को पांच प्रतिषत वोट दूसरी पार्टी से अधिक मिल जाते हंै उसकी सरकार बन जाती है। संविदा कर्मचारियों के पास तो 10 प्रतिषत वोट हैं। इसलिए इस बार संविदा कर्मचारी जिस राजनैतिक पार्टी को आर्षिवाद (वोट) देगें उसकी सरकार बनेगी । संविदा कर्मचारियों को नियमित करने से राज्य सरकार पर किसी प्रकार का वित्तीय भार नहीं आयेगा क्योंकि अधिकांष संविदा कर्मचारी राज्यसरकार द्वारा संचालित परियोजनाएं जिनमें केन्द्र सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जा रही है, में कार्य कर रहे हैं और ये योजनाएं दस - पन्द्रह वर्षो से चल रही हैं संविदा कर्मचारियों को कार्य करते हुये 10 से 15 वर्ष हो गये हैं संविदा कर्मचारियों की औसत आयु 40 से 45 वर्ष के बीच में है।
वेतन और भत्तो की राशि केन्द्र सरकार दे रही है, और ये योजनाएं आगामी दस से पन्द्रह वर्ष और चलनी हैं, जब तक योजनाएं चलेंगी तब तक संविदा कर्मचारी सेवानिवृत्त हो जायेगें। और जो संविदा कर्मचारी विभागीय पदो ंके विरूद्व कार्य कर रहे हैं उनका बजट राज्य सरकार से पूर्वतः ही प्राप्त होता रहेगा, इसलिए यदि संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण कर दिया जाता है तो म.प्र. शासन पर वित्तीय भार भी नहीं आयेगा । उसके बाद भी म.प्र. सरकार संविदा कर्मचारियों को नियमित नहीं कर रही है जिससे 2 लाख संविदा कर्मचारियों और 30 लाख मतदाताओं में आक्रोष है । इसलिए हमारा भाई, बेटा - बेटी आपकी सरकार में संविदा कर्मचारी है आप नियमित कर सकते हैं तो हम आपको जन आर्षिवाद (वोट) दे सकते हैं । जन आर्षिवाद यात्रा के दौरान संविदा कर्मचारी और उनके परिवार के लोग संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौपेगें ।
संविदा कर्मचारियों की पीड़ा यह है किं:
(1) सौतेला व्यवहार:-संविदा कर्मचारीनियमित कर्मचारियों से ज्यादा काम कर रहे हैं, समान पद, समान कार्य है जब वेतन देने की बात आती है तो नियमित कर्मचारियों से आधा दिया जाता है, संविदा कर्मचारियों को वेतनवृद्वि, समय पर मंहगाई भत्ता, चिकित्सा भत्ता, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, चिकित्सा अवकाश, मकान किराया भत्ता नहीं दिया जाता । भारत के किसी संविधान में नहीं लिखा है कि समान पद पर कार्य करने वाले लोगों को असमान वेतन दिया जाए ।
(2) संविदा बढ़ाने के लिए देना पड़ता है एक माह का वेतनः-संविदा कर्मचारियों की संविदा प्रतिवर्ष बढ़ाई जाती है, जिन अधिकारियों के हाथ में संविदा कर्मचारियों की संविदा बढ़ाने का अधिकार रहता है वे अधिकारी संविदा बढ़ाने के लिए संविदा कर्मचारियो से एक - एक माह का वेतन ले लेते हैं । जिलों में संविदा बढ़ाने का अधिकार कलेक्टर और मुख्यकार्यपालन अधिकारी के पास रहता है , इसलिए विभागीय अधिकारी संविदा बढ़ाने के लिए कलेक्टर और सी.ई.ओं के नाम पर पैसा वसूलते हैं ।
(3) पैसा भले ही लैप्स हो जाए पर वेतन और भत्ते नहीं दिये जातेः-केन्द्रीय प्रवर्तित योजनाओं में कर्मचारियों के वेतन और भत्ते की राशि केन्द्र सरकार देती हैं वर्ष के अंत में हजारो करोड़ रूपये लैप्स हो जाता है उसके बावजूद संविदा कर्मचारियों को समय पर मंहगाई भत्ता, चिकित्सा भत्ता, मकान किराया भत्ता, चिकित्सा अवकाश नहीं दिया जाता ।
(4) संविदा कर्मचारी मर जाए तो चंदा करके उसकी अन्त्येष्टी करते हैं:-यदि किसी संविदा कर्मचारी की मृत्यु हो जाए, या कोई गंभीर दुर्घटना हो जाए तो, संविदा कर्मचारी चंदा करके उसकी अन्तेष्टी करवाते हैं तथा गंभीर दुर्घटना में घायल होने पर उसका इलाज चंदा करके करवाते हैं ।
(5) संविदा कर्मचारियों को हटाते वक्त नेर्सिगिक न्याय सिद्वांत का पालन नहीं:-संविदा कर्मचारियों को जब चाहे तब हटा दिया जाता है । संविदा कर्मचारियों को संविदा समाप्त करने की धमकी देकर उल्टे सीधे काम करवाये जाते हैं, जब जांच होती है तो सारा दोष संविदा कर्मचारी पर मढ़ दिया जाता है और संविदा कर्मचारी की सेवा समाप्त कर दी जाती है । नियमित कर्मचारी खुद बच जाते, हटाने के पहले संविदा कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया जाता । संविदा कर्मचारियों को जरा सी लापरवाही होने पर सीधे बर्खास्त कर दिया जाता है कारण बताओं पत्र तक नहीं दिया जाता वही नियमित कर्मचारियों पर ऐसी कोई कार्यवाही नहीं की जाती । उनको ज्यादा से ज्यादा निलंबित किया जाता है। नियमित कर्मचारी निलंबित अवधी में जांच के समय सेटिंग करके बच जाते हैं, लेकिन संविदा कर्मचारी को सीधे सेवा से बर्खास्त कर दिया जाता है, कोई जांच या अपना पक्ष रखने का अधिकार नहीं दिया जाता । जैसे अंग्रेजों के शासन के रोलेक्ट कानून बनाया गया था जिसमें भारतीयों को अंग्रेज बिना अपना पक्ष रखे जेल में डाले देते थे, और जमानत भी नहीं होती थी ।
(6) अधिकारी नियमित करना नहीं चाहते जनप्रतिनिधियों को चिंता नहीं:-संविदा कर्मचारी नियमित हो जायेगें तो अधिकारियों की गुलामी कौन करेगा इसलिए अधिकारी संविदा कर्मचारियों को नियमित नहीं करना चाहते, और जनप्रतिनिधि जिनको जनता चुनकर भेजती है उन्हें संविदा कर्मचारियों की चिंता नहीं । अधिकारी, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को अपने हिसाब से समझाते रहते हैं, क्योंकि जन - प्रतिनिधियों के आस - पास यही लोग रहते हैं ।
(7) पदोन्नती, समयमान वेतनमान नहीं:-जिस पद पर भर्ती हुये उन्हीं पदों पर दस से पन्द्रह वर्ष काम करते हुये हो जाते हैं पदोन्नती नहीं समयमान वेतनमान, वेतनवृद्वि नहीं जो संविदा कर्मचारी पन्द्रह सालों से काम कर रहा है और जिस संविदा कर्मचारी की नियुक्ति आज हुई है उसको भी वही वेतन और जो पन्द्रह साल पहले निुयक्त हुआ था उसको भी वही वेतन दिया जाता है।
(रमेष राठौर)
प्रदेष अध्यक्ष
मो. .9425004231