भोपाल। राजधानी में आज हुई मीटिंग में कई सारे मामलों पर निर्णय लिया गया। भाजपा की अगली प्रदेश कार्यसमिति की मीटिंग 9 फरवरी को भोपाल में होगी, मोर्चों की कार्यकारिणी एक सप्ताह में घोषित की जाएंगी एवं जिलों में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होगा।
आज हुई मीटिंग में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, सांसद नरेन्द्रसिंह तोमर ने कहा कि विधानसभा चुनाव सन्निकट है। समय प्रबंधन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। प्रदेश पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों पर गंभीर दायित्व है वे पार्टी संगठन का चेहरा है, वे आगामी दिनों में समाधान बनें, समस्या का कोई कारण उत्पन्न न होंने दें। अपनी पसंदगी अथवा नापसंदगी को अवरोध उत्पन्न न होने दें।
उन्होनें कहा कि आगामी प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक 9 व 10 फरवरी को भोपाल में आयोजित की जायेगी। इसके पूर्व 8 फरवरी को प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक होगी इस बैठक में कार्यसमिति का एजेंडा तय किया जायेगा। प्रदेश संगठन महामंत्री अरविन्द मेनन ने अपने संबोधन में जिलों में कार्यसमिति, मंडल कार्यसमिति का एक सप्ताह में गठन कर नगर व ग्राम केन्द्रों को सशक्त बनाने का परामर्श दिया। प्रदेश पदाधिकारियों, संभागीय संगठन मंत्रियों, जिला अध्यक्षों और मोर्चा अध्यक्षों ने बैठक में अपना परिचय दिया। बैठक का संचालन प्रदेश महामंत्री नंदकुमार सिंह चौहान ने किया।
नरेन्द्रसिंह तोमर ने बैठक में बताया कि पिछली बार हमारे पास पर्याप्त समय था, विकास यात्राएं महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के अनुरूप निकाली गयी थी। इस वर्ष हमारे पास समय का अभाव है हमें ग्राम, नगर व मतदान केन्द्र की समीक्षा कर उनके सम्मेलनों पर ध्यान केन्द्रित करना है। कार्यक्रमों का विकेन्द्रीकरण करना होगा। प्रदेश में करीब 23016 पंचायतें है और 52 हजार चिन्हित गांव है। इन तक विकास का संदेश पहुंचाना है, इसलिए हर विधानसभा क्षेत्र में हमें कार्यकर्ताओं की टीम बनाकर इस कार्य में जुटना होगा। यह कार्य फरवरी माह में संपन्न हो ऐसी व्यूह रचना की जायेगी। इस दरम्यिान संसद और विधानसभा का सत्र भी होगा लेकिन कार्यकर्ताओं की टीम के साथ सांसद और विधायक भी सुविधा के अनुसार इनमें भाग ले सकें ऐसी व्यूह रचना पर विचार किया जाना चाहिए।
विधानसभा में यह कार्यक्रम अत्यंत विकेन्द्रीकृत होगा। उन्होनें कहा कि प्रदेष कार्यसमिति बैठक में हम कार्यक्रमों को अंतिम रूप देंगे, किन्तु प्रारंभिक तैयारी के रूप में अप्रैल, मई, जून में भी हमें जनता के बीच पहुंचने के लिए रूपांतर के साथ अभियान चलाना होगा। जुलाई व अगस्त में ग्राम केन्द्र व मतदान केन्द्र सम्मेलन और वर्ग आयोजित किये जा सकते है।
25 फरवरी को संत रविदास जयंती वृहत स्तर पर मनाई जायेंगी। संत रविदास जयंती एवं पं. दीनदयाल जयंती 25 सिंतबर को प्रदेश में बडा कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है।
उन्होनें कहा कि दूसरे पखवाडे के बाद नवंबर में विधानसभा चुनाव मतदान की तिथियां संभावित है। इसलिए हमें समयबद्धता के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होनें पार्टी पदाधिकारियों को आगाह किया कि संगठन में यदि मोर्चा अथवा प्रकोष्ठ का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है तो उसे समूची पार्टी का कार्यक्रम मानकर पार्टी को जुट जाना चाहिए। मोर्चा की कार्यसमिति का एक सप्ताह में गठन किया जाये और जिलों में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यक्ता नहीं है।