इन्दौर। सीबीआई कोर्ट ने यहां शहर के दस शातिर नटवरलालों को तीन तीन साल की सजा सुनाई है। इन सभी ने एक फर्जी कंपनी बनाकर लोन लिया, बीमा कराया और लोन की रकम पचा गए। घटना के 22 साल बाद ये निर्णय सुनाया गया।
अभियोजन की कहानी के अनुसार आरोपी हीरालाल खत्री, कन्हैयालाल पंवार, रमेश चंद्र तांबे, अरुण वर्मा, लक्ष्मण शिवानी, अपार अरोरा, गौरीदत्त जोशी, निरंजन शर्मा, ममता सेठी एवं राजकुमार सेठी ने सन् 1990 में एक फर्जी कंपनी बनाई एवं कॉटन की गठानों का कारोबार शुरू करने की दस्तावेजी जानकारी दी।
इस आधार पर उन्होंने एसबीआई से दस दस लाख रुपए के लोन लिए, लोन का बीमा कराया और लोन की रकम पचा गए। बैंक ने जब रिकवरी के लिए इनके द्वारा दिए गए चैक लगाए तो वो सभी बाउंस होने लगे और इसी के बाद इस मामले का खुलासा हुआ।
90 के दशक में यह मामला मध्यप्रदेश में सर्वाधिक चर्चा का विषय रहा एवं सीबीआई न्यायालय में जांच के बाद सजादेही के लिए प्रस्तुत किया गया। इस मामले में आज निर्णय सुनाते हुए श्रीमत शुभ्रा सिंह विशेष न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को तीन तीन साल की सजा सुनाई। आरोपियों में से एक गौरीदत्त जोशी अभी भी फरार है एवं यह निर्णय उसके फरार रहते सुनाया गया।