इंदौर, 22 अक्टूबर 2026: औद्योगिक उपनगर पीथमपुर में एक रोड एक्सीडेंट के कारण तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई। मौत का कारण हाईवे पर किया गया चक्का जाम बताया गया है क्योंकि चक्का जाम के कारण स्कूल बस नहीं आ पाई थी। यदि बच्चे स्कूल बस में होते तो शायद एक्सीडेंट के बाद भी जिंदा होते।
चक्का जाम के कारण स्कूल बस नहीं आई थी
पूरे देश में चक्का जाम और ट्रैफिक डिस्टरबेंस एक आम बात हो गई है। किसी को भी विरोध प्रदर्शन करना हो, अपनी पीड़ा सरकार तक पहुंचानी हो तो वह पब्लिक को परेशान करने लग जाते हैं, चक्काजाम कर देते हैं। भोपाल में पहले किसानों ने और फिर मेडिकल स्टूडेंट्स ने चक्काजाम किया। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन, और कानून होने के बावजूद पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। नतीजा पूरे मध्य प्रदेश में हर बात पर चक्काजाम होने लगा है। पीथमपुर में आज गुरुवार 22 अक्टूबर को सुबह रॉयल टाउन कॉलोनी के करीब 500 परिवारों ने महू-नीमच हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। इसके कारण स्कूल बस का संचालन नहीं हो सका।
बच्चों के शव क्षत-विक्षत हो गए
पैरंट्स ने निजी वाहनों से अपने बच्चों को सेंट फ्रांसिस स्कूल ड्रॉप किया। दोपहर 2:00 बजे जब प्रियांश कक्षा 9, आरुषि कक्षा 7 और मोक्ष कक्षा 5 को परिजन द्वारा बाइक से वापस लाया जा रहा था तभी महेंद्रा ब्रिज के पास ट्रॉले ने टक्कर मार दी। घटनास्थल पर ही तीनों बच्चों की मौत हो गई। टक्कर के बाद बच्चों के शव क्षत-विक्षत हो गए। सड़क पर उनके स्कूल बैग, किताबें और जूते बिखर गए।
चक्का जाम ना करें तो क्या करें
रॉयल टाउन कॉलोनी के रहवासियों का कहना था कि रॉयल टाउन कॉलोनी में पिछले 4-5 दिनों से बिजली नहीं है। इसलिए उन्हें प्रदर्शन करना पड़ा। सवाल यह है कि, अपनी समस्याओं के समाधान के लिए क्या हर व्यक्ति को चक्काजाम करना चाहिए। यदि शिकायत बिजली कंपनी से थी तो बिजली कंपनी के ऑफिस का घेराव करना चाहिए था। नहीं तो कलेक्टर अथवा SDM के ऑफिस का घेराव करते, लेकिन लोग ऐसा नहीं करते क्योंकि चक्काजाम करना ज्यादा आसान है।
अधिकारी भी चक्का जाम को प्रोत्साहित करते हैं
दरअसल बात केवल पब्लिक की नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी भी चक्का जाम को ही प्रोत्साहित करते हैं। यदि नागरिकों का समूह शिकायत करने आए तो सुनवाई नहीं होती। रॉयल टाउन कॉलोनी के लोगों ने भी शिकायत की थी। कई बार अपनी समस्या बताई लेकिन समाधान नहीं हुआ। जब हाईवे पर चक्का जाम किया तो अधिकारी तत्काल आ गए और शाम से पहले ट्रांसफार्मर लगाने का आश्वासन भी दिया। इस तरह के रिजल्ट लोगों को चक्का जाम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
ट्रांसफार्मर तो लग गया, लोगों के घरों में रोशनी भी हो गई लेकिन दो घरों के तीन दीपक हमेशा के लिए बुझ गए। अब वह किसी भी चक्का जाम से दोबारा जिंदा नहीं होंगे।

