भोपाल, 22 अक्टूबर 2026: योग्यता नहीं होने के बावजूद, जुगाड़ की पावरफुल पोस्टिंग के कारण स्कूल शिक्षा विभाग के एक प्राचार्य को न केवल सस्पेंड होना पड़ गया बल्कि उसके ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप भी लग गया है और विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई। इस कार्रवाई में सेवा समाप्ति और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
ठाकुर साहब तो पावर का मजा ले रहे थे
मामला मध्य प्रदेश के सतना जिले का है। श्री गरुड़ प्रताप सिंह (मूल पद प्राचार्य, शा. हाईस्कूल शिवपुरवा) ने जुगाड़ लगाकर विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी रामपुर बाघेलान का प्रभार प्राप्त कर लिया था। BEO की कुर्सी पर बैठने वाले व्यक्ति को ऑनलाइन काम करना आना चाहिए। सैकड़ो डॉक्यूमेंट पर उसके डिजिटल सिग्नेचर होते हैं। ठाकुर साहब को यह सब काम करना नहीं आता था। वह अपने कंप्यूटर ऑपरेटर और अन्य कर्मचारियों पर डिपेंड थे। कर्मचारियों ने माह मई पेड जून से जुलाई पेड अगस्त 2026 तक कर्मचारियों के वेतन, एरियर आदि की कुल राशि 634803/- का भुगतान अन्य प्राइवेट खातों में ट्रांसफर कर दिया। BEO को पेमेंट ऑर्डर का परीक्षण करना होता है लेकिन ठाकुर साहब तो पावर का मजा ले रहे थे। उन्होंने पेमेंट ऑर्डर का परीक्षण ही नहीं किया।
सतना स्कूल शिक्षा के गरुड़ प्रताप सिंह भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड
जब मामले की जानकारी डिपार्टमेंट को लगी तो जांच की गई। जांच में डिजिटल सिग्नेचर करने वाला ही दोषी माना जाता है। इसलिए ठाकुर साहब को दोषी माना गया और सस्पेंड कर दिया गया है। श्री सिंह का उक्त कृत्य अपेक्षित संनिष्ठा एवं कर्तव्यपरायणता के विपरीत एवं म०प्र० सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के प्रतिकूल होकर गंभीर कदाचरण की श्रेणी में पाया गया है। अब विभागीय जांच होगी। भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत डिजिटल एविडेंस को महत्वपूर्ण माना जाता है और यह साबित हो जाने पर भी, कि श्री सिंह को कंप्यूटर की जानकारी नहीं है और जो कुछ भी किया उनके अधीन कर्मचारियों द्वारा किया गया, श्री सिंह की जिम्मेदारी कब नहीं होगी। डिजिटल सिग्नेचर के कारण उनको दोषी माना जाएगा।
भ्रष्टाचार के गंभीर अपराध के कारण श्री सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है एवं उनका सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है।

