भोपाल, 23 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश में शिक्षाकर्मी से अध्यापक संवर्ग में शामिल हुए 70000 शिक्षकों को 7-7 लाख का फायदा होने की संभावना है। सिर्फ इतना ही नहीं, उनके वेतन में भी लगभग ₹15000 मासिक की वृद्धि हो सकती है। यह सब कुछ इसलिए हो रहा है क्योंकि राजेश पांडे सहित 497 शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर कोई हैशटैग नहीं चलाया बल्कि लीगल फील्ड पर लड़ाई लड़ी।
मामला छठा वेतनमान का
जबलपुर स्थित हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश में मध्य प्रदेश सरकार को चार सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। यदि हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देना होगा। दरअसल, हाईकोर्ट में 497 याचिकाएं दायर की गई थीं। इनमें बताया गया कि छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, लेकिन शिक्षकों को इसका लाभ 2016 से दिया जा रहा है।
शिक्षकों को 10 साल का बकाया मिलेगा
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पहली नियुक्ति से सेवा की गणना करने पर उन्हें 2006 से ही वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। इससे 10 साल का बकाया बन सकता है। शिक्षकों के मुताबिक, प्रत्येक शिक्षक को करीब 7 से 8 लाख रुपए तक मिल सकते हैं। इस पर 12% ब्याज मिलेगा। वेतनमान का लाभ मिलने से मासिक वेतन में करीब 15 से 20 हजार रुपए तक का अंतर पड़ सकता है।
राजेश पांडे सहित 497 शिक्षकों के संघर्ष का परिणाम
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता जितेंद्र आर्य ने बताया कि राजेश पांडे सहित 497 शिक्षकों ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। उनका कहना था कि सरकार ने शिक्षा विभाग में संविलियन के दौरान 2018 से पहले की शिक्षकीय सेवा को मान्यता नहीं दी। शिक्षकों ने मांग की कि नौकरी की अवधि पहली नियुक्ति से मानी जाए, ताकि इसी आधार पर उन्हें वरिष्ठता, वेतनवृद्धि, पेंशन और दूसरे लाभ मिल सकें।
सरकार सुप्रीम कोर्ट तक गई थी
हाईकोर्ट के शिक्षकों के पक्ष में फैसले के बाद राज्य सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार की ओर से विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई, जिसे 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद शिक्षकों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर आदेश का पालन कराने की मांग की।
हाई कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है, अब तो पालन होना है
अधिवक्ता जितेंद्र आर्य ने बताया कि पंचायत विभाग के अधीन कार्यरत शिक्षकों का 2016 में शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया था। उनका कहना है कि हाईकोर्ट पहले ही आदेश दे चुका था कि शिक्षकों को 2006 से छठे वेतनमान का लाभ दिया जाए। इसके बावजूद लाभ नहीं मिलने पर अवमानना याचिका दायर की गई। आर्य के मुताबिक, कोर्ट के आदेश के बाद याचिका दायर करने वाले 497 शिक्षकों के साथ प्रदेशभर के करीब 70 हजार शिक्षकों को भी लाभ मिल सकता है।

