IAS संजय दुबे का यह वीडियो वायरल हो रहा है
राहुल सिंह का संजय दुबे से सीधा सवाल
राहुल सिंह ने बताया, भ्रष्टाचार को रोकने का सबसे सरल तरीका
संजय दुबे जी, सिर्फ प्रेजेंटेशन में पोल खोलना पर्याप्त नहीं
संजय दुबे जी, भ्रष्टाचार की पोल खोलना अच्छी बात है, लेकिन इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी? मध्यप्रदेश के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त के नाते मेरा वरिष्ठ IAS अधिकारी संजय दुबे जी से ही सीधा सवाल है। अगर नगरीय निकायों में फिनाइल ₹33,000 प्रति लीटर की दर से खरीदी गई, जबकि दूसरी जगह इसकी कीमत ₹11,000 बताई जा रही है, तो यह सरकारी खरीद की पारदर्शिता और निगरानी पर गंभीर सवाल है। RTI अधिनियम, 2005 की धारा 4 का उद्देश्य ही है कि सरकारी कामकाज और निर्धारित सूचनाएँ स्वतः सार्वजनिक हों, ताकि हर जानकारी के लिए नागरिकों को RTI आवेदन न लगाना पड़े। तो सवाल है कि जब पारदर्शिता का यह कानूनी प्रावधान 2005 से मौजूद है, तो सरकारी खरीद की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं थी? यदि खरीद की दरें, टेंडर और संबंधित सूचनाएँ समय पर वेबसाइट पर उपलब्ध होतीं, तो क्या ऐसी अनियमितताओं पर पहले ही सवाल नहीं उठते? सूचना आयुक्त रहते हुए, मैंने अपने कार्यकाल में हमेशा नगरीय निकाय को अपनी सारी खरीदारी और अपने सारे जनता को प्रभावित करने वाले कामकाज को suo moto, section 4 के तहत वेबसाइट पर रखने के लिए आदेश दिए थे.. किया था, उसके बावजूद उन आदेशों का आदेशों पर अमल नहीं हुआ। संजय दुबे जी, सिर्फ प्रेजेंटेशन में पोल खोलना पर्याप्त नहीं है। जरूरत है कि खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और साक्ष्य मिलने पर संबंधित एजेंसियों के माध्यम से कानूनी कार्रवाई की जाए। मेरा सवाल साफ है जब कानून मौजूद था, तो पारदर्शिता सुनिश्चित क्यों नहीं हुई? और अब खुलासा होने के बाद ठोस कार्रवाई कब होगी? जनता को सिर्फ प्रेजेंटेशन नहीं, जवाबदेही और परिणाम चाहिए। और प्रेजेंटेशन करना ही है तो प्रेजेंटेशन ऐसा होना चाहिए कि यहां पर इतना घोटाला हुआ और ये रही एफआईआर नंबर और यह केस दर्ज किया गया फला।जगह यहाँ पर ये करप्शन हुआ और यह एफआईआर हमने दर्ज करवाई..
— Rahull Singh 🇮🇳 सेवा परमो धर्म: (@rahulreports) October 22, 2026

