भोपाल, 19 सितंबर 2026: भोपाल मंडल के अंतर्गत रेलवे की व्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद होती जा रही है। सुरक्षा को लेकर तो गंभीर स्थिति बन गई है। इटारसी से एक अवैध वेंडर ट्रेन में सवार हुआ, उसमें चलती ट्रेन में महिला यात्री और उसके परिजनों के साथ मारपीट की और भोपाल रेलवे स्टेशन पर उतरकर चला गया। बिल्कुल ऐसे जैसे रेलवे उसके बाप का है। ना तो किसी ने ट्रेन में रोका और ना ही रेलवे स्टेशन पर पकड़ा।
RPF LUCKNOW DIVISION NER ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि, ऐशबाग जंक्शन पर समय 2:09 बजे आने पर उप निरी /ऐशबाग रणजीत द्वारा पेंट्री कार मैनेजर द्वारा बताया गया कि, गाड़ी में इटारसी से भोपाल के मध्य S4 कोच में बाहर के वेंडर द्वारा एक महिला यात्री और उसके परिजन से मारपीट की गई थी और वह यात्री और वेंडर सभी लोग भोपाल तक उतर गए। यह जांच इसलिए की गई क्योंकि अंकित पांडे नाम के एक यात्री ने घटना का वीडियो वायरल कर दिया था।
अंकित ने ही बताया था कि, ट्रेन संख्या 12590 (चार्लापल्ली–गोरखपुर एक्सप्रेस) से एक गंभीर मामला सामने आया है। पति और बच्चे के साथ यात्रा कर रही एक महिला यात्री के साथ पैंट्री स्टाफ एवं कुछ वेंडरों ने कथित तौर पर मारपीट की।
कृपया ध्यान दीजिए कि यहां पर पैंट्री स्टाफ की बात भी की गई है और वीडियो में एक से अधिक लोग मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक पुलिस अधिकारी भी दिखाई दे रहा है जो बीच बचाव कर रहा है। जांच करना जरूरी है कि क्या वह ऑन ड्यूटी था। और इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद उसने चेन पुलिंग क्यों नहीं की? उसने अगले स्टेशन पर सुरक्षा अधिकारियों को सूचित क्यों नहीं किया?
रिश्वत लेकर पूरी ट्रेन ठेके पर दी जाती है
अवैध वेंडर, पूरी निर्भीकता के साथ ट्रेन में सवार होते हैं और उतर जाते हैं। मतलब वह ट्रेन के अलावा दो रेलवे स्टेशनों पर भी होते हैं लेकिन दोनों रेलवे स्टेशन पर उनका कोई नहीं पकड़ता। रेलवे की समझ रखने वाले श्री राहुल शरण बताते हैं कि, दरअसल ऐसा एक रेलवे मंडल के अंतर्गत आने वाले रेलवे स्टेशनों के बीच में होता है। पहले रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर को रिश्वत देकर अवैध वेंडर, खाद्य पदार्थों की बिक्री या करते थे। अब सीधे डीआरएम ऑफिस से डील होती है इसलिए मंडल के अंतर्गत आने वाले किसी भी रेलवे स्टेशन से सवार हो सकते हैं और किसी भी रेलवे स्टेशन पर उतर सकते हैं। कुछ मामलों में तो अवैध वेंडर को पूरी ट्रेन का ठेका दिया जाता है। मतलब वह जो चाहे और जितनी कीमत में चाहे, बेच सकते हैं। यदि कोई ग्राहक शिकायत भी करेगा तो सुनवाई का ड्रामा तो किया जाएगा लेकिन कार्रवाई नहीं की जाएगी। शायद आपको याद आ जाए, रेलवे की तरफ से जब अवैध वेंडर के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो, कभी भी यह नहीं बताया जाता कि अवैध वेंडर कौन थे, उनका नाम और फोटो नहीं दिया जाता है। जबकि यदि किसी यात्री को अवैध टिकट पकड़ा जाता है तो वीडियो भी जारी करते हैं।
West Central Railway's clarification (Update 2:50 PM · Sep 19, 2026)
The issue is under detailed investigation by the RPF. The concerned vendors have been identified and are being duly questioned. Remarks of passengers who were travelling in the train, during the incident, are also being taken. Efforts are being made to contact the concerned group of unauthorised passengers (as confirmed by the passengers of S-4 coach) also. Due action shall be taken as per the investigation report.
पैंट्री स्टाफ या दबंगई? :- ट्रेन में यात्री सुरक्षा पर गंभीर सवाल
— Ankit Pandey (@AnkitPandey_7) September 19, 2026
ट्रेन संख्या 12590 (चार्लापल्ली–गोरखपुर एक्सप्रेस) से एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि पति और बच्चे के साथ यात्रा कर रही एक महिला यात्री के साथ पैंट्री स्टाफ एवं कुछ वेंडरों ने कथित तौर पर मारपीट की।
यदि… pic.twitter.com/CWwUZrMkX1

