UPI MDR नामंजूर, नगद भुगतान लेंगे: मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप एसोसिएशन

Updesh Awasthee
भोपाल, 18 सितंबर 2026:
यूपीआई ट्रांजैक्शन पर फीस और फीस के ऊपर जीएसटी के खिलाफ मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लिया है। उनका कहना है कि हम इस तरह की फीस को ना मंजूर करते हैं और ग्राहकों से नगद भुगतान लिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पूरे मध्य प्रदेश में यूपीआई ट्रांजैक्शन के ऊपर फीस और फीस के ऊपर 18% जीएसटी का भुगतान करने के लिए कोई भी दुकानदार तैयार नहीं है। 

सरकार को 1 महीने का अल्टीमेटम

मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने UPI मध्य से पेमेंट प्राप्त करने पर सरकार द्वारा लगाई गई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) फीस को स्वीकार कर दिया है। संगठन ने सरकार को 1 महीने का समय दिया है और कहा है कि यदि एक महीने में फैसला वापस नहीं लिया जाता तो मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंप पर UPI के माध्यम से पेमेंट नहीं लिया जाएगा। 16 अक्टूबर से यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा- प्रदेश में 4700 पेट्रोल पंप हैं। UPI से पेमेंट लेने से हर पंप मालिक पर महीने का 17 हजार 400 रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसे सहन नहीं कर सकते।

सर्विस प्रोवाइडर को फीस और सरकार को जीएसटी क्यों दें?

उल्लेखनीय है कि, ईंधन को रियायती श्रेणी में रखा गया है और 2000 रुपए की सीमा से ऊपर के प्रत्येक लेन-देन पर 5 रुपए का एक समान एमडीआर लागू है, इसके बावजूद 18% जीएसटी के साथ प्रति लेनदेन यह लागत 5.90 रुपए बैठती है। अजय सिंह ने बताया कि हर पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन औसत 100 ट्रांजेक्शन 2000 रुपए से अधिक के होते हैं। ऐसे में 500 रुपए अतिरिक्त चुकाने पड़ेंगे। 18% जीएसटी के 90 रुपए मिलाकर यह राशि 590 रुपए हो जाएगी। किस प्रकार महीने का अतिरिक्त बोझ औसत 17 हजार 400 रुपए बढ़ेगा। सभी 4700 पंपों की बात करें तो 8.17 करोड़ रुपए मालिकों की जेब से बेवजह निकलेंगे। हमारा व्यवसाय पहले ही छोटे मार्जिन वाला है।

UPI PAYMENT से इनकार कर सकते हैं 

मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि, भारत में किसी भी दुकानदार द्वारा किसी भी प्रकार की भारतीय मुद्रा को स्वीकार करने से मना करना अपराध है लेकिन डिजिटली भुगतान एक विकल्प है। डिजिटल भुगतान प्राप्त करने से मना करना कोई अपराध नहीं है। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बृजेंद्र सिंह रघुवंशी ने कहा- पंप पर बचत कम है और खर्च बढ़ गया है। कर्मचारियों की सैलरी, बिजली बिल समेत कई भुगतान करने होते हैं। 5.9 प्रतिशत MDR+GST देते हैं तो हमारे पास क्या बचेगा? यह राशि कंपनियों से ही वसूलनी चाहिए। हम तो पंप बंद करना चाहते हैं, लेकिन कंपनी के नियमों में फंसे हैं। दूसरी ओर, सरकार की नीतियां भी विरोध में हैं। ऐसे में पंप का संचालन करना मुश्किल हो रहा है।

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