सेंट्रल न्यूज डेस्क, 18 सितंबर 2026: संयुक्त राष्ट्र महासभा का नया सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब जलवायु संकट की कीमत अब केवल तापमान, उत्सर्जन या मौसम के आंकड़ों में नहीं दिखाई देती। नेपाल में पिछले महीने हुई विनाशकारी ग्लेशियर आपदा ने इस बहस को सीधे उन लोगों की जिंदगी और नुकसान से जोड़ दिया है, जो जलवायु संकट में सबसे कम योगदान देने के बावजूद उसके असर का सामना कर रहे हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं। UNGA के लिए तैयार किए गए एक climate curtain-raiser के मुताबिक, नेपाल की इस त्रासदी ने Global South के वार्ताकारों के बीच चिंता बढ़ाई है और COP31 में Loss and Damage Fund के लिए संसाधन जुटाना प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है।
नेपाल के विदेश मंत्री Shisir Khanal ने कहा है कि नेपाल के लिए मिलने वाली मदद को aid या charity के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब जलवायु आपदाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान का पैमाना लगातार बड़ा हो रहा है।
दस्तावेज़ के मुताबिक, बीमा उद्योग का अनुमान है कि जलवायु से जुड़े नुकसान अब हर साल 171 अरब डॉलर तक पहुंच रहे हैं, जो एक साल पहले के अनुमान से 19 अरब डॉलर अधिक है।
UNGA के बाद निगाहें COP31 पर होंगी, जिसकी मेजबानी Türkiye और Australia से जुड़ी है। दोनों देशों के बीच COP31 के नतीजों को लेकर decision-making की स्पष्टता पर नजर रहेगी। इस बीच दोनों Presidencies ने electrification के नए वैश्विक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। हालांकि, curtain-raiser के मुताबिक फिलहाल यह पहल formal negotiations के बाहर रहने की उम्मीद है।
21 सितंबर को Türkiye अपनी “Action Agenda” भी पेश करने वाला है। इसमें 10 initiatives शामिल होने की उम्मीद है। इसी दौरान छह देशों की घोषणा भी हो सकती है, जिन्हें “Climate Implementation Bridge” में शामिल किया जाएगा। यह पहल electrification drive के लिए financing से जुड़े pilot projects पर केंद्रित होगी।
Electrification COP31 की तैयारी में एक बड़ा विषय बनता दिख रहा है। Türkiye के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan के UNGA में electrification pledge पर बोलने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसके विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं। इसमें देशों द्वारा electrification के लिए GDP का एक निश्चित हिस्सा लगाने जैसी प्रतिबद्धता शामिल हो सकती है।
21 और 22 सितंबर को Global Renewables Alliance summit में भी अधिक देशों के इस government initiative से जुड़ने की उम्मीद है। यह पहल जून में London Climate Action Week के दौरान शुरू की गई थी।
इस पूरी बहस के बीच climate finance फिर केंद्र में रहेगा।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बुधवार को UN Climate Summit में दुनिया के नेताओं से 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को जिंदा रखने के लिए अब तक हुई प्रगति, climate finance जुटाने और adaptation पर किए गए काम के बारे में बताने को कहेंगे।
Climate action में केवल नई घोषणाएं ही नहीं, fossil fuels से बाहर निकलने की ठोस योजनाएं भी चर्चा में हैं। France और Netherlands ने fossil fuels से transition के लिए national roadmaps प्रकाशित किए हैं। COP31 से पहले Presidencies पर इस बात का दबाव बढ़ रहा है कि electrification targets को clean power, developing और vulnerable economies के लिए financial support और घरेलू स्तर पर ठोस कार्रवाई के साथ जोड़ा जाए।
इसी संदर्भ में coal phase-out dates जैसे binding measures का भी उल्लेख किया गया है। यानी climate commitments की चर्चा अब केवल long-term targets तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि देशों की घरेलू नीतियां उन लक्ष्यों को किस हद तक लागू करती हैं।
समुद्र भी UNGA से COP31 तक के climate agenda में जगह बना रहा है।
Türkiye के Trabzon summit में COP31 अध्यक्ष Murat Kurum ने ocean projects को financing opportunities से जोड़ने के लिए एक mechanism और “Blue roadmap” विकसित करने की बात कही है। हालांकि, इसके विवरण अभी तय नहीं हुए हैं। खास तौर पर यह स्पष्ट होना बाकी है कि Action Agenda में oceans और seas पर Türkiye की पहल को formal negotiations के किसी ठोस outcome से कैसे जोड़ा जाएगा।
इस बीच कई नए आंकड़े भी UNGA और COP31 की बहस को संदर्भ देंगे।
Climate Analytics के एक आकलन के अनुसार, मौजूदा नीतियों के चलते Australia के सामने 2050 तक 245 million tonnes का unaddressed emissions gap रह सकता है। Climate Action Tracker का आकलन है कि Türkiye 2035 तक अपनी घोषित 35x35 electrification goal को हासिल नहीं कर पाएगा और domestic electrification लगभग 25 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
भारत के लिए भी इसी हिस्से में एक महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ा है। IISD के आकलन के मुताबिक, electric vehicles के जरिए crude oil imports को कम करने से भारत को 2035 तक 10.3 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। उसी रिपोर्ट में Germany और Türkiye के gas-import savings तथा China में wind और solar के विस्तार से संभावित दीर्घकालिक बचत का भी अनुमान दिया गया है।
Türkiye के energy mix को लेकर Ember का आंकड़ा भी सामने आया है। 2025 में wind और solar ने वहां कुल electricity mix का 22 प्रतिशत हिस्सा दिया, जबकि coal 34 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा single source बना रहा।
24 सितंबर को IRENA की एक रिपोर्ट tripling renewables और doubling energy efficiency के वैश्विक लक्ष्यों की दिशा में बची हुई कमियों और policy recommendations पर ध्यान देगी।
इस साल UNGA का climate agenda इसलिए कई अलग-अलग मुद्दों को एक साथ जोड़ रहा है। नेपाल की आपदा Loss and Damage की बहस को मानवीय स्तर पर सामने ला रही है। Electrification energy transition को आगे बढ़ाने का एक रास्ता बनकर उभर रहा है। Climate finance उन देशों के लिए केंद्रीय सवाल बना हुआ है जिनके पास adaptation और transition दोनों के लिए सीमित संसाधन हैं। और oceans की चर्चा यह याद दिलाती है कि climate crisis जमीन तक सीमित नहीं है।
UNGA में होने वाली घोषणाओं के बाद असली परीक्षा COP31 में होगी। वहां यह देखना होगा कि इन पहलों में से कितनी formal negotiations, financing और देशों की घरेलू नीतियों में बदलती हैं। रिपोर्ट: निशांत सक्सेना।

