भोपाल समाचार, 28 सितंबर 2026: ऐसे नेता हमेशा चर्चित होते हैं जो अच्छा भाषण देते हैं, चाहे झूठा आश्वासन देना पड़े लेकिन जनता से मीठी-मीठी बातें करते हैं लेकिन एक सफल नेता उसे कहा जाता है, जिसकी अपील पर जनता अपने हिस्से की आहुति देने के लिए घर से बाहर निकल आए। आज एक ऐसा उदाहरण देखने को मिला। महाकाल के परम भक्त, बाल्य काल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक डॉ मोहन यादव ने जब अपील की तो मुस्लिम समाज ने भी 100 साल पुरानी मस्जिद को हटा दिया।
उज्जैन में लोग इसलिए मोहन भैया को पसंद करते हैं
दरअसल, मामला सिंहस्थ 2018 (उज्जैन महाकुंभ) मेले में आने वाले 40 करोड़ श्रद्धालुओं का है। इतनी बड़ी संख्या में जब श्रद्धालु आने वाले हैं तो, रास्तों को भी चौड़ा करना पड़ेगा। मीटिंग में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फ्री एंड दिया था कि, सिंहस्थ श्रद्धालुओं के लिए जो भी सुविधाजनक रहे, वह फैसला किया जाए। अधिकारियों ने बताया कि यदि सबसे उचित मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा तो इसमें आपका पैतृक निवास भी आएगा। मुख्यमंत्री होने के नाते डॉ मोहन यादव के पास विकल्प था, परियोजना में परिवर्तन कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। पितृ पक्ष में, जब लोग अपने पैतृक निवास की साफ सफाई करके, पूर्वजों का आमंत्रित करते हैं, उनका भोजन सत्कार इत्यादि करते हैं, दान धर्म करते हैं। डॉ मोहन यादव ने अपना पैतृक निवास ही सिंहस्थ को समर्पित कर दिया। मतलब उन्होंने यह नहीं कहा कि जनता को आदेश का पालन करना होगा बल्कि पहले स्वयं सरकारी आदेश का पालन किया, फिर लोगों से अनुरोध किया।
200 से ज्यादा लोगों ने अपने घर और मुसलमानों ने मस्जिद हटाई
डॉक्टर मोहन यादव की अपील और उज्जैन के बुजुर्गों के निर्देशन में 200 से ज्यादा लोगों ने अपने घर, अपनी संपत्ति का कुछ ना कुछ हिस्सा सिंहस्थ को समर्पित किया ताकि सिंहस्थ के श्रद्धालुओं को कोई कष्ट ना हो। इस परियोजना में जब कोई मंदिर आया तो श्रद्धापूर्व उसको शिफ्ट कर दिया गया और जब उज्जैन की विश्व प्रसिद्ध शाही मस्जिद का विषय आया तो, देश भर के कई विघ्नसंतोषियों ने, सांप्रदायिकता की आग भड़कने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री की अपील पर उज्जैन के मुस्लिम समाज ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। उन्होंने स्वयं अपने हाथों से अपनी मस्जिद को बिल्कुल वैसे ही हटा दिया जैसे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्वयं कुदाल चला कर अपने पैतृक निवास को समर्पित कर दिया था।


