भोपाल, 23 सितंबर 2026: गुना शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र में एक बार फिर सामंतवाद की शुरुआत होती दिखाई दे रही है। कुछ दिनों पहले श्रीमंत महाराज साहब श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का वीडियो वायरल हुआ था। आज उनके दरबारी, विधायक श्री रमेश प्रसाद खटीक का वीडियो वायरल हो रहा है। इसके बीच में शिवपुरी कलेक्टर की एक कार्रवाई भी चर्चा में है। इस एडिशन में हम लेटेस्ट न्यूज़, पुराने घटनाक्रम से मैच होता पैटर्न और ग्वालियर चंबल संभाग में सामंतवाद का क्या मतलब होता है, सब कुछ सरल और संक्षिप्त में बता रहे हैं:
लेटेस्ट न्यूज़ नंबर 1: सिंधिया के दरबारी, विधायक का वीडियो वायरल
केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दरबारी कहे जाने वाले विधायक श्री रमेश प्रसाद खटीक का एक वीडियो वायरल हो रहा है। ("दरबारी" का मतलब होता है नेता का खास, ग्वालियर चंबल में श्री सिंधिया को महाराज साहब कहा जाता है, इसलिए उनके खास लोगों को दरबारी कहते हैं)। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि, कुछ ग्रामीण अपने सरपंच को लेकर रात के समय विधायक महोदय के घर पहुंच गए। विधायक महोदय बनियान और पैजामा में दिखाई दे रहे हैं। वह लोगों को धमका रहे हैं और घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड करने वाले व्यक्ति के साथ हल्का बल प्रयोग भी किया गया। विधायक महोदय की बॉडी लैंग्वेज और शब्द कुछ इस प्रकार के हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में नाराज होने वाले अन्य किसी विधायक अथवा मंत्री के नहीं होते, लेकिन कहानियों में सुना है कि दरबारी के होते हैं।
लेटेस्ट न्यूज़ नंबर 2: कलेक्टर का मिल्क पाउडर एक्सपायरी, तो बाजार में छापामारी
शिवपुरी के कलेक्टर को तो आप जानते ही होंगे। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री अर्पित वर्मा। इनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें श्री वर्मा स्थानीय सांसद को "महाराज साहब" कहकर संबोधित कर रहे थे। फिर पता चला कि, केवल पॉलिटिक्स में इंटरेस्ट नहीं रखते बल्कि एक्टिव भी है। एक पॉलिटिकल इवेंट में शामिल हुए थे। फिर एक और वीडियो दिखाई दिया जिसमें "महाराज साहब" के पीछे हाथ बांधकर खड़े हुए थे। आजादी के बाद मध्य प्रदेश में कलेक्टर के पीछे हाथ बांधकर अर्दली को खड़े हुए देखा है, लेकिन पहली बार स्थानीय सांसद के पीछे किसी कलेक्टर को हाथ बांधकर खड़े हुए देखा।
पृष्ठभूमि का मतलब यह है कि, कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा, श्रीमंत महाराज साहब श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के काफी नजदीकी हैं। 21 सितंबर को कलेक्टर साहब के घर एक मिल्क पाउडर का डिब्बा पहुंचा जो पहले से एक्सपायर हो चुका था। बस फिर क्या था, कलेक्टर साहब का दरबारी जाग गया, और एक के बाद एक चार मेडिकल स्टोर सील कर दिए गए। चार इसलिए किए गए ताकि कोई यह न कृपा के कलेक्टर साहब ने बदले की कार्रवाई की है। लेकिन अब लोग यह कह रहे हैं कि, चूहे ने पतलून कुतर डाली तो लाट साहब (राजतंत्र के समय शिवपुरी के कलेक्टर को लोग लाट साहब कहते थे) ने पूरे खलिहान में आग लगवा दी।
श्रीमंत महाराज साहब का वायरल वीडियो
अभी कुछ दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक ग्रामीण युवक, गांव तक सड़क के लिए मांग पत्र सौंपते हुए बोल रहा था कि यदि इस बार चुनाव से पहले सड़क नहीं बनी तो हम किसी को वोट नहीं देंगे। इसके बाद महाराज साहब ने जो कहा सो कहा, लेकिन उनकी आंखों ने जो कहा, उसका प्रभाव काफी महसूस हुआ।
मैच होता पैटर्न
राजनीति में, जनता की नाराजगी अक्सर सामने आती रहती है। यदि आप सत्ता में है तो जनता ऐसी बातों पर भी आपसे नाराज हो जाती है जो आपके क्षेत्राधिकार में ही नहीं आते, लेकिन फिर भी संयम से काम लेना होता है। राजनीति में रहते हैं कि, जो व्यक्ति उग्र भीड़ को नियंत्रित कर सकता है उसको अच्छा नेता कहा जाता है और जो व्यक्ति उग्र भीड़ को अपने पक्ष में कर लेता है, वह महान नेता होता है। उपरोक्त घटनाक्रम में नेताओं के बीच "सहनशीलता" की कमी देखी गई। जलवायु परिवर्तन के कारण लोगों के शब्दों में आजकल असभ्यता दिखाई देने लगी है, लेकिन एक नेता को हमेशा क्षमाशील होना चाहिए।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को भी निष्पक्षता स्थापित करने और बदले की कार्रवाई की भावना पर नियंत्रण करना सिखाया जाता है। एक अर्दली और कलेक्टर में यही अंतर होता है। शिवपुरी में एक्सपायर डेट के प्रोडक्ट की बिक्री, कोई नई बात नहीं है। यदि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायत के आधार पर शहर भर में छापामार कार्रवाई हो गई होती, तो आज पूरी जनता कलेक्टर कार्यालय के सामने खड़ी होकर ताली बजा रही होती। लोगों को इस बात पर आपत्ति नहीं है की कार्रवाई क्यों की गई, लोग तो केवल इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि जब अपने घर में एक्सपायरी डेट का मिल्क पाउडर पहुंचा, तभी कार्रवाई क्यों की गई? जनता के जीवन का कोई मूल्य नहीं है क्या?
ग्वालियर चंबल में सामंतवाद का अर्थ
सामंतवाद की शुरुआत यूरोप से हुई। इसको अंग्रेजी में Feudalism कहते हैं। इसका मतलब होता है राजा के कुछ खास शक्तिशाली लोग, जो भूमि के बड़े हिस्से के मालिक हैं और जमीन पर खेती करने वाले किसानों पर शासन करते हैं। इतिहासकार श्री आर एस शर्मा ने भारतीय सामंतवाद की परिभाषा को यूरोप से अलग बताया है। यह यूरोप की तुलना में थोड़ा काम कठोर था। मुगल काल में जागीरदारी और ब्रिटिश काल में जमींदारी व्यवस्था इसी का रूप थी। आजादी के बाद ग्वालियर चंबल संभाग में, और खासतौर पर राजनीति में सामंतवाद शब्द का काफी उपयोग हुआ। सामंतवाद के खिलाफ मोर्चाबंदी भी हुई। दरअसल, 1947 में देश तो आजाद हो गया लेकिन ग्वालियर चंबल में, जनता के हृदय में महाराज सिंधिया के प्रति अटूट प्रेम था। मतलब ऐसा की जवाहरलाल नेहरू का लोकतंत्र भी चकनाचूर हो गया था।
जयविलास पैलेस ग्वालियर, मतलब महल (कैलाश वासी राजमाता साहब और कैलाश वासी माधवराव सिंधिया) के समर्थक इस बात को जानते थे और पूरा फायदा उठाते थे। वह जनता पर अत्याचार करते थे और महाराज के नाम पर; वह महाराज के नजदीकी हैं, जनता यह बात जानती है, इसलिए महाराज के नाम का उपयोग किए बिना भी निर्बल पर अत्याचार और नियमों का उल्लंघन किया करते थे। इस तरह के अत्याचारों की जानकारी राजमाता और महाराज साहब को नहीं मिल पाती थी, क्योंकि वह दोनों जनता की सीधे संपर्क में नहीं थे। जब जनता का कष्ट बढ़ गया तो सामंतवाद का विरोध शुरू हुआ और इसका नुकसान सिंधिया परिवार को उठाना पड़ा।
2019 के चुनाव में भी श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को, उनके समर्थकों के कर्मों की सजा मिली थी। एक बार फिर वैसे ही स्थिति की शुरुआत होती दिखाई दे रही है। अभी चुनाव में 2 वर्ष बाकी हैं, देखते हैं इन 2 वर्षों में क्या बढ़ता है और क्या कम होता है।


