जबलपुर, 23 सितंबर 2026: कमजोर व्यक्ति जब जीवन यापन के लिए संघर्ष करता है, तो एक वक्त ऐसा आता है जब वह अपने वरिष्ठ अधिकारी का लिहाज करना बंद कर देता है। कलेक्टर ने कर्मचारी के अभ्यावेदन पर निर्णय नहीं लिया तो कर्मचारी ने कलेक्टर के खिलाफ कलम चला दी। नतीजा हाई कोर्ट से कलेक्टर के नाम का वारंट जारी हो गया।
मामला मध्य प्रदेश के पन्ना जिले का है। कमजोर कर्मचारी का नाम है जाविन आरा रिजवी, और कलेक्टर के पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा की महिला अधिकारी उषा परमार, विराजमान हैं। दोनों के बीच में कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है। याचिकाकर्ता पन्ना कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन आफिसर के पद पर कार्यरत थीं। नियमितीकरण की मांग को लेकर उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को याचिका का निराकरण करते हुए कलेक्टर को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर 90 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।
कलेक्टर ने हाई कोर्ट को पूरी तरह से इग्नोर कर दिया
कलेक्टर ने हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। इसका नुकसान कर्मचारी को हुआ। डॉक्यूमेंट में तो कहीं नहीं लिखा लेकिन व्यावहारिक तौर पर माना जाता है कि कर्मचारी ने अपने नियमितीकरण के लिए कलेक्टर की ड्योढ़ी पर, नाक जरूर रगड़ी होगी, फिर भी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित कर्मचारियों ने कलम चलाई और हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना की याचिका दाखिल कर दी। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने पाया कि अवमानना याचिका पर 4 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद कलेक्टर की ओर से न तो अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराई गई और न ही हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश की गई।
बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुभानल्लाह
आदेश में उल्लेख है कि कलेक्टर ने पांच अक्टूबर, 2025 को हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर नोटिस प्राप्त होने की जानकारी दी थी। कलेक्टर कार्यालय की स्थापना शाखा के प्रभारी अधिकारी को इस मामले में संपर्क अधिकारी भी नियुक्त किया गया था। इसके बाद भी आदेश के अनुपालन के संबंध में आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।
कलेक्टर के खिलाफ वारंट, हाई कोर्ट की मजबूरी थी
हाई कोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए कलेक्टर की उपस्थिति सुनिश्चित करने और पूर्व आदेश के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट कराने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी करना आवश्यक माना। कोर्ट ने पन्ना एसपी को वारंट की तामील कराने तथा कलेक्टर को 30 सितंबर को हाई कोर्ट के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विद्या प्रसाद ने पैरवी की।

