Livspace कंपनी को कैश रिफंड की जगह गिफ्ट वाउचर देना पड़ा भारी, भोपाल उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला

Updesh Awasthee
भोपाल, 2 सितंबर 2026
: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, भोपाल (क्रमांक-1) ने प्रसिद्ध होम इंटीरियर और फर्नीचर कंपनी लिवस्पेस (Livspace India Pvt Ltd) को सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह ग्राहक की एडवांस बुकिंग राशि को 9% ब्याज के साथ लौटाए और साथ ही मानसिक प्रताड़ना व अदालती खर्च के लिए मुआवजा भी दे। 

The Case Details: Prateek Saraswat vs. Livspace India Pvt Ltd

भोपाल के सलैया निवासी प्रतीक सारस्वत ने अपने घर के रिनोवेशन के लिए मॉड्युलर फर्नीचर (Modular Furniture) की तलाश में 25 जुलाई 2025 को नर्मदापुरम रोड, भोपाल स्थित लिवस्पेस के शोरूम से संपर्क किया था। शोरूम के प्रतिनिधियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि यदि वे ₹25,000 की एडवांस राशि जमा कर बुकिंग करते हैं और किसी भी कारण से 48 घंटे के भीतर इसे रद्द करते हैं, तो पूरी राशि सीधे उनके बैंक खाते में वापस (Cash Refund) कर दी जाएगी। इस भरोसे पर प्रतीक ने उसी दिन ₹25,000 का ऑनलाइन भुगतान कर दिया। हालांकि, बाद में प्रोडक्ट्स की रेंज और उनके दाम पसंद न आने के कारण उन्होंने मात्र 12 घंटे के भीतर (26 जुलाई 2025 को) ही बुकिंग रद्द करने और रिफंड की मांग कर दी। 

कैश रिफंड की जगह थमा दिया 'गिफ्ट कार्ड'

बुकिंग कैंसिल करने के बाद कंपनी ने कैंसिलेशन टिकट तो जारी कर दिया, लेकिन बार-बार ईमेल और व्हाट्सएप पर संपर्क करने के बावजूद ग्राहक के पैसे वापस नहीं किए। इसके विपरीत, 12 अगस्त 2025 को कंपनी ने प्रतीक को ₹25,000 का एक 'गिफ्ट कार्ड' (Gift Card) भेज दिया, जिसकी वैधता एक साल की थी। प्रतीक ने इसका कड़ा विरोध किया क्योंकि बुकिंग के समय गिफ्ट वाउचर देने की कोई शर्त नहीं बताई गई थी। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline) से भी समाधान न मिलने पर उन्होंने अपनी एडवोकेट डॉ. प्राप्ति सक्सेना के माध्यम से कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा और अंततः उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।

कंपनी के दावों को आयोग ने किया खारिज

सुनवाई के दौरान लिवस्पेस कंपनी ने अधिवक्ता सुश्री अलीशा खान के माध्यम से अपना पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि उन्होंने बुकिंग के बाद ग्राहक को एक 'स्वागत ईमेल' (Welcome Mail) भेजा था, जिसमें उनकी कड़े नियमों वाली कैंसिलेशन पॉलिसी स्पष्ट रूप से दी गई थी। कंपनी का कहना था कि उनकी नीतियों के तहत नकद रिफंड संभव नहीं था और गिफ्ट कार्ड जारी कर उन्होंने कोई सेवा में कमी नहीं की। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल, सदस्य डॉ. श्रीमती प्रतिभा पाण्डेय और डॉ. संजीव सिंह की पीठ ने कंपनी के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। 

आयोग ने पाया कि बुकिंग के समय ग्राहक और कंपनी के बीच ऐसा कोई लिखित अनुबंध (Written Contract) नहीं हुआ था जिसमें कैश रिफंड न देने या गिफ्ट वाउचर स्वीकार करने की बात कही गई हो। बुकिंग रद्द करने के बाद एकतरफा नियम थोपना और जबरन गिफ्ट कार्ड थमाना पूरी तरह से 'सेवा में कमी' की श्रेणी में आता है।

उपभोक्ता आयोग का फैसला (The Verdict)

आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए लिवस्पेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को निम्नलिखित आदेश जारी किए हैं:
  • कंपनी को ₹25,000 की मूल एडवांस राशि, बुकिंग की तारीख (25-07-2025) से लेकर वास्तविक भुगतान की तारीख तक 9% वार्षिक ब्याज के साथ लौटानी होगी।
  • सेवा में कमी और भ्रामक जानकारी से हुई मानसिक परेशानी के लिए कंपनी को ₹10,000 का हर्जाना देना होगा।
  • शिकायतकर्ता को कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में ₹5,000 का भुगतान करना होगा।
कंपनी को इस आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया जाता है, तो मुआवजे और मुकदमेबाजी की राशि पर भी 9% वार्षिक ब्याज देय होगा।
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