भोपाल, 1 सितंबर 2026: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद (कैबिनेट) की बैठक में भोपाल के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। इस बैठक में भोपाल शहर को मुख्य रूप से दो बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात मिली है।
1. पश्चिम भोपाल बायपास के लिए ₹3,774 करोड़ की भारी-भरकम राशि मंजूर
भोपाल की सड़क कनेक्टिविटी और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन निर्माण कार्य को पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। इस प्रोजेक्ट पर कुल 3,774 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत कुल निर्माण लागत 3,225 करोड़ 51 लाख रुपये स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त, निर्माण-पूर्व कार्यों (जैसे भू-अर्जन आदि) के लिए 548 करोड़ 29 लाख रुपये का भुगतान भी राज्य के बजट के माध्यम से किया जाएगा।
भोपाल को होने वाले सीधे फायदे:
यातायात में सुगमता: जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इंदौर आने-जाने वाले वाहनों को अब भोपाल शहर के अंदर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे शहर के आंतरिक रास्तों पर हैवी ट्रैफिक का दबाव बेहद कम हो जाएगा।
समय और दूरी की बचत: इस बायपास के बन जाने से इंदौर-जबलपुर मार्ग पर चलने वाले वाहनों के लिए यात्रा की दूरी 21 किलोमीटर कम हो जाएगी।
रिंग रोड का निर्माण: इस बायपास को पूर्वी (ईस्टर्न) बायपास से जोड़कर पूरे भोपाल शहर के चारों ओर एक संपूर्ण रिंग रोड का निर्माण पूरा किया जाएगा।
एलाइनमेंट (मार्ग) में बदलाव:
रातापानी टाइगर रिजर्व घोषित होने, बड़े तालाब (Bhoj Wetland) के कैचमेंट एरिया में पर्यावरण विभाग के नोटिफिकेशन के प्रभाव, और राज्य पुरातत्व विभाग की प्राचीन धरोहर शिवमंदिर (समसगढ़) के मुख्य मार्ग पर आने के कारण इसके पुराने एलाइनमेंट में बदलाव किया गया है। इस कारण अब इसकी कुल लंबाई 35.61 किलोमीटर होगी।
2. RGPV का पुनर्गठन: भोपाल में बनेगा 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय'
भोपाल के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय संतुलन और गुणवत्ता विस्तार के लिए कैबिनेट ने एक और बड़ा निर्णय लिया है। भोपाल स्थित वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का पुनर्गठन किया जा रहा है। अब RGPV के स्थान पर भोपाल में 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' की स्थापना की जाएगी। इस नवगठित विश्वविद्यालय के अधीन भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग के सभी तकनीकी महाविद्यालय (Technical Colleges) शामिल किए जाएंगे। इससे प्रशासनिक सुगमता बढ़ेगी और तकनीकी शिक्षा के स्तर में सुधार होगा।

