भोपाल, 5 सितंबर 2026: पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह गजब के नेता है। 2003 से विपक्ष में है। इतनी लंबी नर्मदा यात्रा कर ली लेकिन भूख हड़ताल, आमरण अनशन जैसा कुछ भी नहीं करते। नीलम पार्क में चल रहा है शिक्षक भर्ती पद वृद्धि आंदोलन में उन्होंने 24 घंटे के उपवास की घोषणा तो कर दी थी लेकिन आज लंच के बाद आए और डिनर के पहले चले गए। गए तो गए, जो कैंडिडेट जो भूख हड़ताल पर थे, उनकी भी हड़ताल तुड़वा गए।
सूरज के डूबने से पहले दिग्विजय सिंह उठ गए
श्री दिग्विजय सिंह आज दोपहर करीब 1:00 बजे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उम्मीद थी उनके नाम पर भारी भीड़ होगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, हां मीडिया के कैमरों की संख्या बहुत थी। 24 घंटे के उपवास की घोषणा की थी, इसलिए उम्मीद थी कि 5 सितंबर को दोपहर 1:00 बजे से लेकर 6 सितंबर को दोपहर 1:00 बजे तक उपवास पर रहेंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सूर्य को अस्त होते हुए देख उन्होंने स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह को फोन लगा दिया। चर्चा के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि वह मंगलवार को भोपाल में रहेंगे और आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ चर्चा कर लेंगे इसके बाद जो उचित निर्णय होगा वह कार्रवाई की जाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने, इतने दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे उम्मीदवारों से परामर्श ही नहीं लिया और एक तरफा निर्णय लेते हुए कहा कि उनके (स्कूल शिक्षा मंत्री के) आश्वासन पर यह युवा भूख हड़ताल खत्म कर रहे हैं।
स्कूल शिक्षा मंत्री से बातचीत के अंत में श्री दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि वे भी मंगलवार को इन आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि मंडल के साथ स्कूल शिक्षा मंत्री से चर्चा करने मंत्रालय पहुंचेंगे। मतलब हेडलाइंस में बने रहने की एक और अपॉर्चुनिटी उठा ली। जिन्होंने ₹500 में शिक्षाकर्मियों की भर्ती की, जिन्होंने कमलनाथ के 70-80-90% वाले फैसले का विरोध नहीं किया, वह पदवृद्धि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। लास्ट मिनट में तो बिल्कुल ऐसा लगा जैसे स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने, एक योजना के तहत श्री दिग्विजय सिंह को भूख हड़ताल तुड़वाने के लिए भेजा था। कुल मिलाकर कैंडीडेट्स आज की तारीख तक कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ उल्टा 15 दिनों से चल रही भूख हड़ताल टूट गई।

