ग्वालियर वाली शिवानी भारद्वाज को टीकमगढ़ में ग्रेनाइट का पट्टा कैसे दे दिया: विधानसभा प्रश्न

Updesh Awasthee
भोपाल, 21 जुलाई 2026:
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान 21 जुलाई 2026 को टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले में ग्रेनाइट पत्थर के उत्खनन पट्टों के आवंटन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा गरमाया रहा। विधायक यादवेन्द्र सिंह ने खनिज साधन विभाग से संबंधित प्रश्न क्रमांक 279 के माध्यम से एक रसूखदार फर्म को दिए गए पट्टे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 

30 वर्ष के लिए पट्टा आवंटन पर सवाल 

विधायक यादवेन्द्र सिंह ने सदन में पूछा कि क्या कलेक्टर जिला टीकमगढ़ द्वारा ग्राम बसदोरा जंगल (तहसील निवाड़ी) के खसरा नंबर 37/1/मि-1 में 6.900 हेक्टेयर रकबे पर ग्रेनाइट उत्खनन के लिए 30 वर्ष की लंबी अवधि का पट्टा जारी किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह पट्टा मेसर्स कामता नाथ मिनरल्स की पार्टनर श्रीमती शिवानी भारद्वाज (निवासी थाटीपुर, ग्वालियर) के नाम पर 8 जून 2021 को स्वीकृत किया गया था। 

वन भूमि और अनापत्ति प्रमाण पत्र का विवाद 

विधायक ने पट्टे की वैधता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या प्रश्नगत भूमि राजस्व विभाग द्वारा वन विभाग को हस्तांतरित कर वन क्षेत्र घोषित की जा चुकी थी। उन्होंने सरकार से जानकारी माँगी कि क्या इस पट्टे को जारी करने से पहले संबंधित विभागों से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और अनुशंसा प्राप्त की गई थी? यदि नहीं, तो किस आधार पर वन भूमि पर खनन की अनुमति दी गई। 

सरकार ने कोई उत्तर नहीं दिया

इसके अतिरिक्त, विधायक ने उक्त खदान से अब तक जारी किए गए पिट पास (उत्खनन एवं परिवहन अनुमति) की जानकारी और पट्टा आवंटन की प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की जाँच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की है। इस महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से सदन को बताया गया कि इस मामले में जानकारी एकत्रित की जा रही है। 

बड़ा सवाल
यह पट्टा मेसर्स कामता नाथ मिनरल्स की पार्टनर श्रीमती शिवानी भारद्वाज (निवासी थाटीपुर, ग्वालियर) के नाम पर 8 जून 2021 को स्वीकृत किया गया था, और विधानसभा में प्रश्न 21 जुलाई 2026 को पूछा गया। 

पहला प्रश्न तो यह है कि माननीय विधायक महोदय अब तक क्या कर रहे थे? क्या वह किसी का इंतजार कर रहे थे? या फिर उनको अपनी विधानसभा में ग्रेनाइट जैसी महत्वपूर्ण खदान के बारे में जानकारी ही नहीं थी? 
यह स्वीकार करना कठिन होगा कि यादवेंद्र सिंह जैसे विधायक की जानकारी में यह बात नहीं रही होगी। इसलिए सवाल तो बनता है कि, माननीय विधायक श्री यादवेंद्र सिंह ने यह प्रश्न वन भूमि की रक्षा के लिए लगाया है या इसके पीछे कोई और उद्देश्य है। 

दूसरा प्रश्न यह है कि पट्टा जारी होने के 5 साल बाद प्रश्न लगाया गया है और उसके बाद भी विधानसभा में सरकार की ओर से कहा गया है कि "जानकारी एकत्रित की जा रही है" इसका क्या मतलब हुआ? 

अब देखना यह है कि, टीकमगढ़ के जागरूक नागरिक, एक्टिविस्ट, पत्रकार एवं विधायक यादवेंद्र सिंह के विरोधी इस मुद्दे को जिंदा रख पाते हैं या नहीं।

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