भोपाल, 21 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा के जुलाई 2026 के मानसून सत्र के दौरान मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के माध्यम से होने वाली भर्तियों, चयन सूचियों में देरी और विभिन्न विभागों में आयोग की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल-जवाब हुए। पिछले साल पर जितने भी प्रदर्शन हुए, MPPSC की तरफ से अक्सर कहा गया कि इसके लिए हम नहीं बल्कि सरकारी विभाग जिम्मेदार हैं लेकिन आज विधानसभा में मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि विभाग नहीं आयोग जिम्मेदार है।
उच्च शिक्षा विभाग की सूचियों में देरी और भर्ती की समय-सीमा
विधानसभा में विभिन्न विभागों के रिक्त पदों को भरने के संबंध में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में सरकार ने बताया कि किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के अंतर्गत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के 2784 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया कर्मचारी चयन मंडल और लोक सेवा आयोग के माध्यम से वर्तमान में प्रचलित है। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग के संबंध में सरकार ने यह स्वीकार किया कि लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2024 एवं 2025 के विज्ञापनों के लिए चयन सूचियां प्राप्त होने के बाद ही पदों की पूर्ति की जा सकेगी। चयन सूचियों के प्राप्त होने में लगने वाले समय के कारण सरकार ने इन पदों को भरने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा बताने में असमर्थता जताई है।
अतिथि विद्वानों को आरक्षण और आयु सीमा में छूट
उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत अतिथि विद्वानों के भविष्य को लेकर श्री पंकज उपाध्याय (बहोरीबंद) विधायक द्वारा किए गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने स्पष्ट किया कि उन्हें सीधे नियमित करने की कोई योजना नहीं है। इसके स्थान पर, अतिथि विद्वानों को मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली भर्ती परीक्षाओं में सभी श्रेणियों में 25 प्रतिशत आरक्षण और अधिकतम 10 वर्ष की आयु सीमा में छूट का लाभ देने का प्रावधान किया गया है।
महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर में सीधी भर्ती का मामला
विधायक ललिता यादव द्वारा महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर में सहायक प्राध्यापकों की सीधी भर्ती को लेकर पूछे गए सवाल में यह मांग की गई थी कि क्या सरकार इस भर्ती को लोक सेवा आयोग के माध्यम से कराएगी। इसके जवाब में उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने स्पष्ट रूप से 'जी नहीं' कहते हुए बताया कि नियमों के अनुसार विश्वविद्यालय स्वयं अपना नियोक्ता (Appointing Authority) है, इसलिए यह भर्तियां आयोग के माध्यम से नहीं की जा रही हैं।
आयोग की चयन प्रक्रिया का उदाहरण
विधानसभा में पुरानी भर्तियों का संदर्भ देते हुए बताया गया कि राज्य सेवा परीक्षा 2009 के परिणामों के आधार पर ही श्रवण बाधित श्रेणी के अंतर्गत अनुशंसित अभ्यर्थियों की नियुक्ति मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत) जैसे पदों पर की गई थी। यह जानकारी टीकमगढ़ जिले के एक प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति की वैधता की जांच के संबंध में दी गई थी।
MPPSC के कारण देरी हो रही है
विधानसभा सत्र के दौरान आए जवाबों से यह संकेत मिलता है कि सरकार रिक्त पदों को भरने के लिए लोक सेवा आयोग पर निर्भर है, लेकिन चयन सूचियों के प्राप्त होने में हो रही देरी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। वहीं, अतिथि विद्वानों जैसे संवर्गों के लिए आयोग की परीक्षाओं में विशेष रियायतें देकर उन्हें मुख्यधारा की भर्ती में शामिल होने का अवसर दिया जा रहा है।

.webp)