स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दिव्यांगों के साथ अन्याय, एक की सेवा समाप्त और दूसरे को नौकरी नहीं मिली

Updesh Awasthee
भोपाल, 6 जुलाई 2026:
मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बार फिर अन्याय किया है। इस बार दिव्यांग के साथ न्याय किया गया। सिस्टम को फुल प्रूफ बनाना अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने ऐसा सिस्टम बनाया जिसके कारण, एक योग्य दिव्यांग को नौकरी नहीं मिली और दूसरे दिव्यांग की सेवा समाप्त हो गई। यदि सिस्टम ठीक होता तो ऐसा बिल्कुल नहीं होता।

30 मार्च 2023 की लिस्ट में नाम था

कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, जिला-छतरपुर (मध्य प्रदेश) द्वारा जारी किए गए सेवा समाप्ति आदेश में लिखा है कि, दिनांक 30.03.2023 को श्री सुरेन्द्र पटेल रोल नंबर 22769673 पिता श्री रिषि कुमार पटेल पता 63/3 लुकायन पोस्ट बकायन बटियागढ़, जिला दमोह (म.प्र.) 470673 की नियुक्ति प्राथमिक शिक्षक पद पर शासकीय केन्द्रीय प्राथमिक शाला बक्स्वाहा (डाईस कोड-23090202301) जिला छतरपुर (म.प्र.) में दिव्यांगता श्रेणी HH में की गई थी। 

नियुक्ति देने के बाद मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा

नियुक्ति आदेश की कंडिका-7 में अंकित प्रावधान अनुसार संबंधित का मेडिकल बोर्ड से परीक्षण कराया गया। जिला मेडिकल बोर्ड, छतरपुर (म.प्र.) द्वारा अपने पत्र क्रमांक/दिव्यांग बोर्ड/2024/6694, छतरपुर, दिनांक 24.07.2024 के द्वारा श्री सुरेन्द्र पटेल की दिव्यांगता परीक्षण हेतु संभागीय मेडिकल बोर्ड, सागर (म.प्र.) की ओर रेफर किया गया, तदोपरान्त श्री पटेल दिव्यांगता परीक्षण हेतु संभागीय मेडिकल बोर्ड, सागर (म. प्र.) के समक्ष उपस्थित हुये, क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवायें, सागर संभाग, सागर (म.प्र.) के पत्र क्रमांक/मेडी. बोर्ड/2025-26/12202, सागर, दिनांक 18.06.2026 के द्वारा प्रस्तुत प्रमाणीकरण/प्रतिवेदन अनुसार पर श्री सुरेन्द्र पटेल की दिव्यांगता श्रेणी श्रवण बाधित में 23 प्रतिशत दिव्यांगता पाई गई है तथा सेवा हेतु अनफिट प्रतिवेदित किया गया है। 

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 2 (ध) 

में निम्नानुसार लेख है-
धारा 2 (ध) दिव्यांगजन से ऐसी दीर्धकालिक, शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, या संवेदी हानि वाला व्यक्ति अभिप्रेत है, जिससे बाधाओं का सामना करने में अन्य व्यक्तियों के साथ समान रूप से समाज मे पूर्ण और प्रभावी भागीदारी में रूकावट उत्पन्न होती हो।
2 (s) "person with disability" means a person with long term physical, mental, intellectual or sensory impairment which, in interaction with barriers, hinders his full and effective participation in society equally with others;

सुनवाई का अवसर प्रदान किया

श्री सुरेन्द्र पटेल की श्रवण बाधित दिव्यांगता केवल 23 प्रतिशत होने अर्थात शासकीय सेवा हेतु निर्धारित न्यूनतम दिव्यांगता 40 प्रतिशत स्थाई से कम होने के कारण संबंधित को दिव्यांगता श्रेणी में नियुक्ति की पात्रता नहीं है। इस क्रम में अभ्यर्थी सुरेन्द्र पटेल को दिनांक 29.06.2026 को समक्ष में सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया। सम्बन्धीजन श्री सुरेन्द्र पटेल, प्राथमिक शिक्षक द्वारा दिनांक 29.06.2026 को समक्ष में उपस्थित होकर प्रतिवाद प्रस्तुत किया गया, किन्तु प्रस्तुत प्रतिवाद में श्री पटेल दिव्यांगता के सम्बन्ध में अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके, तथा जबाब समाधानकारक नहीं पाया गया। 

संबंधित द्वारा सुनवाई दिनांक 29.06.2026 के दौरान प्रस्तुत जवाब समाधानकारक न होने तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 2 (ध) के तहत एवं लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश भोपाल के पत्र क्रमांक/यूसीआर/सी/248/दिव्यांग/2023/2101, भोपाल, दिनांक 21.11.2023 के द्वारा प्रदत्त निर्देशों के अनुक्रम में दिव्यांग श्रेणी में पात्रता न रखने के कारण संबंधित को पद पर बनाए रखना वैधानिक नही है। अतः श्री सुरेन्द्र पटेल पिता श्री रिषि कुमार पटेल की आदेश क्रमांक/स्था.3/यूसीआर/प्रा.शि.नियु./2023/1796, छतरपुर, दिनांक 30.03.2023 से प्राथमिक शिक्षक पद पर की गई नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त की जाती है।
(कौशल सिंह) डिप्टी कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी जिला-छतरपुर (म.प्र.) 

स्कूल शिक्षा विभाग के सिस्टम ने दिव्यांग के साथ अन्याय किया

इस पूरी प्रक्रिया से एक बात स्पष्ट होती है कि स्कूल शिक्षा विभाग के सिस्टम ने दिव्यांग के साथ अन्याय किया है। हम सुरेंद्र पटेल की बात नहीं कर रहे हैं। बात दरअसल ऐसी है कि जब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन किया जा रहे थे तब यह वेरीफाई क्यों नहीं किया कि दिव्यांगता 40% है या नहीं। जब पुलिस में लिखित परीक्षा की बात फिजिकल टेस्ट के लिए अलग से आयोजन किया जाता है तो फिर दिव्यांग उम्मीदवारों को सामान्य उम्मीदवारों के साथ नियुक्ति क्यों दी जाती है। उनके मेडिकल टेस्ट के लिए अलग से आयोजन क्यों नहीं किया जाता? 

यदि अलग से आयोजन किया जाता तो सुरेंद्र पटेल का फैसला नियुक्ति मिलने के पहले हो जाता और यदि सुरेंद्र पटेल 40% से अधिक दिव्यांग नहीं थे, तो वेटिंग लिस्ट में मौजूद दूसरे दिव्यांग को नौकरी मिल जाती। अब जबकि नियुक्ति के 3 साल बाद फैसला किया गया है तो इसका असर यह हुआ कि स्कूल में एक पद रिक्त हो गया, एक योग्य दिव्यांग व्यक्ति को नौकरी नहीं मिली, और सिस्टम की गड़बड़ी के कारण शासन को हाई कोर्ट में मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है। 

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