MP में पदोन्नति का रास्ता साफ़: विधिक परामर्श के बाद सरकार ने दिए प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

Updesh Awasthee
Madhya Pradesh Public Service Promotion Rules 2025 Latest News Update
भोपाल समाचार, 30 जून 2026: मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने राज्य में लंबे समय से रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। 30 जून 2026 को जारी इस पत्र के माध्यम से शासन ने स्पष्ट किया है कि Madhya Pradesh Public Service Promotion Rules 2025 के अंतर्गत अब प्रमोशन की कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है। यह निर्णय महाधिवक्ता (Advocate General) और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सी.एस. वैद्यनाथन द्वारा दिए गए विधिक परामर्श (Legal Opinion) के आधार पर लिया गया है।

Legal Opinion on MP Government Employee Promotion and Court Proceedings

इस महत्वपूर्ण निर्णय का मुख्य आधार वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सी.एस. वैद्यनाथन की वह कानूनी राय है, जिसमें उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं और पूर्व में दिए गए मौखिक आश्वासनों की समीक्षा की है। गौर करने वाली बात यह है कि न्यायालय में सुनवाई के पहले दिन राज्य सरकार द्वारा एक मौखिक और अनौपचारिक आश्वासन (Oral and informal assurance) दिया गया था कि कार्यवाही लंबित रहने तक पदोन्नति नहीं की जाएगी। हालांकि, श्री वैद्यनाथन ने स्पष्ट किया कि यह आश्वासन किसी न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं था और न ही इसे कोर्ट ने दर्ज किया था। अब, क्योंकि संबंधित बेंच के माननीय न्यायाधीशों के स्थानांतरण और पदोन्नति के कारण मामला नए सिरे से सुना जाना है, इसलिए पुराने आश्वासन की परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।

Administrative Crisis and 40 Percent Staff Strength in MP Government

विधिक परामर्श में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि मध्य प्रदेश में पदोन्नति की प्रक्रिया पिछले लगभग एक दशक से रुकी हुई है। इसके परिणामस्वरूप, राज्य वर्तमान में अपनी sanctioned strength के केवल 40% हिस्से के साथ काम कर रहा है। प्रमोशन न होने के कारण न केवल उच्च पद खाली पड़े हैं, बल्कि निचले स्तरों पर नई भर्ती भी प्रभावित हो रही है, जिससे गंभीर प्रशासनिक कठिनाइयां (Serious administrative difficulties) पैदा हो रही हैं। ऐसी स्थिति में, जनहित को ध्यान में रखते हुए पदोन्नति को और अधिक समय तक रोकना उचित नहीं माना गया है।

Supreme Court Precedents and Conditional Promotions in Madhya Pradesh

कानूनी राय में माननीय उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों, जैसे Bank of Baroda v. Sadruddin Hasan Daya और Patanjali Ayurved Limited, का हवाला देते हुए बताया गया है कि मौखिक आश्वासन तब तक बाध्यकारी नहीं होते जब तक वे हलफनामे (Affidavit) पर न हों या कोर्ट के आदेश में दर्ज न हों। इसके अलावा, State of Madhya Pradesh v. Vinay Kumar Babele के मामले का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं लंबित होने मात्र से सरकार को DPC आयोजित करने और conditional promotions (सशर्त पदोन्नति) देने से नहीं रोका जा सकता। हालांकि, ये सभी पदोन्नतियाँ माननीय न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। 

Instructions to Departments for Initiation of Promotion Proceedings MP

सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव, श्री अजय केटेसरिया ने समस्त विभाग के भारसाधक सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे महाधिवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता के विधिक परामर्श के अनुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब विभिन्न विभागों में DPC (Departmental Promotion Committee) की बैठकें आयोजित की जा सकेंगी और पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल सकेगा, जिससे शासन के कामकाज में गति आएगी और रिक्त पदों को भरा जा सकेगा। रिपोर्ट: शोएब सिद्दीकी।





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