संभावित सूखे से निपटने CM मोहन की रणनीति का पहला चरण संपन्न, बर्बाद नहीं होंगे करोड़ों किसान

Updesh Awasthee
भोपाल, 30 जून 2026:
प्राकृतिक आपदाओं के मामले में सामान्य तौर पर राज्य सरकारें अंतिम समय तक इंतजार करती है और फिर जब आपदा आ जाती है तो प्राकृतिक आपदा को भगवान की मर्जी बताकर कठिन समय गुजारने की अपील करती हैं लेकिन अच्छी सरकार वह होती है जो संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर ली थी है। जैसे मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एल नीनो (El Niño) के कारण संभावित सूखे के संकट से निपटने के लिए "जल गंगा संवर्धन अभियान-2026" चलाया और 3.62 लाख से अधिक जल संरचना होगा पुनरुद्धार किया। इसके लिए सरकार की तरफ से 10000 करोड रुपए खर्च किए गए जबकि लाखों सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा श्रमदान किया गया जिसका कोई मूल्य नहीं है। 

एल नीनो का मुकाबला करने के लिए तैयार है मध्य प्रदेश

भारत में इस साल एल नीनो (El Niño) के प्रभाव से सामान्य से कम बारिश होने और सूखे की संभावना जताई जा रही है। ऐसे समय में जब देश के कई हिस्से पानी की किल्लत से जूझ सकते हैं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक मिसाल पेश की है। उन्होंने "जल गंगा संवर्धन अभियान-2026" के माध्यम से समय रहते राज्य को जल संकट से बचाने के लिए पुख्ता तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, और इसीलिए राज्य सरकार ने 19 मार्च से 30 जून तक 100 दिनों का यह विशेष अभियान चलाकर कुओं, बावड़ियों और तालाबों के जीर्णोद्धार का संकल्प पूरा किया है। 

Impact of Jal Ganga Samvardhan Abhiyan 2026 on Madhya Pradesh water resources 

मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में प्रशासन एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयासों का परिणाम यह रहा कि Jal Ganga Samvardhan Abhiyan under CM Mohan Yadav के तहत लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 3 लाख 62 हजार से अधिक जल संरचनाओं का पुनरोद्धार किया गया है। इस अभियान के माध्यम से प्राचीन जल स्रोतों, अमृत सरोवरों और नदियों को नया जीवन मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, इन बड़े पैमाने पर किए गए कार्यों के कारण ही मध्य प्रदेश आज देश के बड़े राज्यों में जल संरक्षण कार्यों में नंबर-1 बनकर उभरा है। अभियान के समापन पर यह घोषणा की गई कि भले ही कार्यक्रम औपचारिक रूप से समाप्त हो रहा है, लेकिन Rainwater harvesting and river conservation efforts in MP आने वाली पीढ़ियों के लिए निरंतर जारी रहेंगे। 

Successful water conservation models in Rajgarh Madhya Pradesh and irrigation growth 

इस अभियान में राजगढ़ जिला एक रोल मॉडल के रूप में सामने आया है, जो जल संचय कार्यों में देश के श्रेष्ठ 6 जिलों में शामिल हुआ है। राजगढ़ में 341 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के विकास कार्य किए गए, जिनमें सिंचाई के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 3 वर्षों में राजगढ़ जिले में सिंचाई का रकबा 50 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 2.5 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है। राज्य स्तर पर भी सिंचित भूमि का रकबा 44 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर हो चुका है, जिससे किसानों को सूखे के संकट से सुरक्षा मिली है।

Drought prevention strategies for farmers and financial support by MP Government 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने न केवल जल का संचय किया, बल्कि Best drought prevention strategies for farmers को अपनाते हुए उनके आर्थिक हितों की भी रक्षा की है। सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को 2625 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान कर 100 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया है। इसके अतिरिक्त, राजगढ़ के 405 स्व-सहायता समूहों को 20 करोड़ रुपये की सहायता राशि और लाड़ली बहनों को आर्थिक लाभ प्रदान कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी गई है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने भी जनता से अपील की है कि वे कम वर्षा के अनुमान से डरें नहीं और saving every drop of water for future generations के संकल्प के साथ जनभागीदारी सुनिश्चित करें। 

Rejuvenation of ancient water sources and spiritual significance of Jal Ganga 

इस अभियान का नाम 'जल गंगा' रखने के पीछे एक गहरा सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण है। मध्य प्रदेश की पार्वती, चंबल, कालीसिंध और क्षिप्रा जैसी नदियाँ आगे जाकर पवित्र गंगा नदी में मिलती हैं, जिससे यह पूरा क्षेत्र गंगा बेसिन (Ganges Basin) का हिस्सा बन जाता है। सनातन संस्कृति में जल के विशेष महत्व को देखते हुए, मुख्यमंत्री ने नदियों के पुनर्जीवन और नालों की सफाई को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही, उज्जैन में होने वाले सिहस्थ-2028 (Simhastha 2028) की तैयारियों के तहत भी जल प्रबंधन और बुनियादी ढांचे पर तेजी से काम चल रहा है, जहाँ लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।

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