भोपाल, 6 जुलाई 2026: भोपाल शहर के चार इलाकों में मानवीय गतिविधियों पर अंकुश लगाने की जरूरत है, क्योंकि यहां की फॉरेस्ट फर्टिलिटी बढ़ रही है, और हम सब जानते हैं, जंगल के कारण ही हम जीवित रह पाएंगे नहीं तो क्लाइमेट चेंज के प्रभावों के कारण अगले 10 साल में लोग विभिन्न बीमारियों से मर जाएंगे। इस समाचार को कृपया किसी ऐसे व्यक्ति तक पहुंचाइये जो पावरफुल भी हो और समझदार भी हो, ताकि एक निर्णय की स्थिति बन सके, क्योंकि यह एक ऐसा सब्जेक्ट है जो जनता की समझ में आता नहीं, और बिल्डर लॉबी इसका विरोध करती है। और पर्यावरण प्रेमी भी केवल उगे हुए पेड़ों से चिपक कर वीडियो बनाने में इंटरेस्टेड रहते हैं।
भोपाल का नया जंगल: आदमपुर छावनी (घंटी), एयरपोर्ट रोड, कलियासोत डैम कैचमेंट एरिया और समरधा
वैसे तो पूरा भोपाल शहर ही मूल रूप से जंगल और तालाब है। यहां के मूल निवासी इंसान नहीं वन्य प्राणी और जलीय जीव हैं, लेकिन फिलहाल वर्तमान की बात करते हैं। साल 2021 से 25 तक नगर निगम द्वारा आदमपुर छावनी (घंटी), एयरपोर्ट रोड, कलियासोत डैम कैचमेंट एरिया और समरधा क्षेत्र में 2,65,625 पौधे लगाए गए थे। आज 2026 में जब पौधों की गणना की गई तो 1,76,270 पौधे न केवल सुरक्षित है बल्कि पेड़ बन चुके हैं। 5 साल पहले तक इस जमीन की फॉरेस्ट फर्टिलिटी रेट 46% थी, जो 2025 में बढ़कर 74% हो गई है।
भोपाल से पलायन नहीं करना तो इन इलाकों को खाली करो
ऐसी दुर्लभ जमीन पृथ्वी पर बहुत कम पाई जाती है। क्लाइमेट चेंज एक ऐसी समस्याएं जिसको समाप्त नहीं किया जा सकता लेकिन इसके प्रभाव को कम करने के लिए अपने शहर को सुरक्षित किया जा सकता है। जंगल, तालाब, नदियां और बायोडायवर्सिटी को सुरक्षित करके हम अपने रहने के लिए एक ऐसा शहर बना सकते हैं जो क्लाइमेट चेंज से पैदा हो रही परेशानियों को कम कर सकता है। भोपाल में उमस बढ़ रही है और यह केवल पहला सिग्नल है। इसके बाद बहुत कुछ होना है। यदि आदमपुर छावनी (घंटी), एयरपोर्ट रोड, कलियासोत डैम कैचमेंट एरिया और समरधा जैसी जमीनों को जंगल के लिए आरक्षित कर दिया, तो अगले 25 साल तक भोपाल में रह सकते हैं। अब यह भोपाल के भाग्य विधताओं को तय करना है, भोपाल में अगले 25 साल तक रहना है या 5 साल बाद पलायन करना है।

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