व्यावसायिक प्रशिक्षकों की बड़ी जीत: भोपाल में भारी विरोध के बाद झुका विभाग, सेवा वृद्धि के आदेश जारी

Updesh Awasthee
भोपाल, 1 जुलाई 2026
: मध्य प्रदेश की राजधानी में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे नवीन व्यावसायिक शिक्षा-प्रशिक्षक महासंघ (NVETA) के संघर्ष की बड़ी जीत हुई है। 29 जून से शुरू हुए इस अनिश्चितकालीन आंदोलन और 30 जून को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के प्रस्तावित 'महा-घेराव' के दबाव में आकर प्रशासन को झुकना पड़ा। लोक शिक्षण संचालनालय ने 30 जून 2026 को आधिकारिक आदेश जारी कर व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवा वृद्धि की घोषणा कर दी है। 

आंदोलन की पृष्ठभूमि और पुलिसिया दमन 

आंदोलन का शंखनाद 29 जून को भोपाल के आंबेडकर पार्क में हुआ, जहाँ प्रदेश भर से आए 3500 से अधिक व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अपनी मांगों के लिए आवाज उठाई। पुलिस और प्रशासन ने आंदोलन को रोकने के लिए दमनकारी कार्रवाई भी की, लेकिन प्रशिक्षकों का हौसला नहीं डिगा। इस आंदोलन को 'मध्य प्रदेश शिक्षक संघ' का भी पुरजोर समर्थन प्राप्त हुआ, जिसके प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर ने इन प्रशिक्षकों के शोषण को बंद करने की मांग की थी।

30 जून का ऐतिहासिक घेराव और सफलता 

महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष जगदीश सिंह परमार के नेतृत्व में प्रशिक्षकों ने 30 जून को DPI का ऐतिहासिक घेराव किया। प्रशिक्षकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश था कि वे पिछले 10 वर्षों से मात्र ₹20,000 के अल्प मानदेय पर काम कर रहे हैं, जबकि दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में यह वेतन ₹38,600 से अधिक है।

लोक शिक्षण संचालनालय का आदेश 

आंदोलन के बढ़ते दबाव के परिणामस्वरूप, लोक शिक्षण संचालनालय ने दिनांक 30/06/2026 को पत्र क्रमांक /SS(SE)/VE/2026-27/2383 जारी किया। इस आदेश के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
सत्र 2026-27 हेतु समस्त स्टार्स विद्यालयों और पीएमश्री योजना के अंतर्गत संचालित विद्यालयों में व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवाओं में 30 सितम्बर 2026 अथवा आगामी आदेश तक (जो भी पूर्व में हो) की वृद्धि की गई है।
सभी संबंधित व्यावसायिक प्रशिक्षकों को 1 जुलाई 2026 को आवंटित विद्यालयों में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अनुबंध की शेष शर्तें सत्र 2024-25 एवं 2025-26 के अनुसार यथावत रहेंगी।
आदेश की कापी भोपाल समाचार के टेलीग्राम चैनल https://t.me/bhopalsamachar1 पर उपलब्ध है। तत्काल डाउनलोड कर सकते हैं। 

अधूरी मांगों पर टिकी नजरें 

हालांकि सेवा वृद्धि का आदेश जारी होना एक प्रारंभिक सफलता है, लेकिन महासंघ की अन्य प्रमुख मांगें अभी भी लंबित हैं। इनमें सम्मानजनक वेतनवृद्धि (दिल्ली-हरियाणा की तर्ज पर), आकस्मिक व मातृत्व अवकाश की पात्रता, और पूरे 12 महीने की सेवा के साथ पूर्ण जॉब सुरक्षा शामिल है। संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सभी 4-सूत्रीय मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपने अधिकारों के लिए सजग रहेंगे।
इस आदेश के जारी होने से प्रदेश के हजारों व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने राहत की सांस ली है और इसे अपनी एकजुटता की जीत बताया है।

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