भोपाल, 1 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय की इसी आदत ने उनको मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया। जो बात संगठन और संघ के पदाधिकारियों के सामने कही जानी चाहिए थी। वह बात पत्र में लिखकर डॉक्यूमेंट की गई और फिर पत्र को लीक कर दिया गया। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में श्री कैलाश विजयवर्गीय ने क्षेत्रवाद को मुद्दा बनाते हुए बगावत की धमकी दी है।
Why Did Kailash Vijayvargiya Write and Leak the Letter? Is It About Indore or Something Bigger?
उज्जैन के मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जो कर रहे हैं, उसमें नया कुछ भी नहीं है। एक तो उज्जैन सिंहस्थ 2028 आ रहा है और दूसरा डॉक्टर मोहन यादव अपने क्षेत्र का विकास कर रहे हैं तो क्या बेईमानी कर रहे हैं। यही सब कुछ कमलनाथ ने छिंदवाड़ा के लिए और शिवराज सिंह चौहान ने बुधनी के लिए किया है, नहीं तो आप बताओ बुधनी में इतने बड़े मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की क्या जरूरत है। दिग्विजय सिंह के समय ग्वालियर से भोपाल जाने वाली बस राघोगढ़ होते हुए जाती थी, आप बताओ बस को जबरदस्ती राघोगढ़ ले जाने की क्या जरूरत थी। हर पावरफुल नेता अपने क्षेत्र का विकास करता है और फिर इंदौर का जितना विकास होना था हो चुका, अब बाकी मध्य प्रदेश की बारी है। सबका विकास होना चाहिए।
कैलाश विजयवर्गीय ने बगावत की धमकी दी है
अपने पत्र में कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर की क्षेत्रीयता का मुद्दा उठाया है। यह बात सही है कि श्री विजयवर्गीय इंदौर के पावरफुल भाजपा नेता है लेकिन वह एकमात्र और अंतिम नहीं है। इंदौर के साथ न्याय नहीं हुआ तो उन्हें जनता के साथ खड़ा होना पड़ेगा। हम सब जानते हैं की राजनीति में जब कोई क्षेत्र की बात करता है तो असल में वह अपनी बात कर रहा होता है। मतलब श्री विजयवर्गीय के पत्र में जितनी भी जगह इंदौर लिखा गया है, वहां कैलाश विजयवर्गीय पढ़ा जाए?
जबलपुर और महाकौशल में तो क्रांति हो जानी चाहिए
मंत्री विजयवर्गीय के पत्र को लेकर राज्यसभा में कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा कि यदि कैलाश विजयवर्गीय इंदौर की उपेक्षा से आहत हैं, तो जबलपुर और पूरे महाकौशल क्षेत्र में तो बगावत की स्थिति होनी चाहिए।
बात इंदौर की है या कुछ और?
दरअसल श्री कैलाश विजयवर्गीय, सुश्री उमा भारती के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। श्री बाबूलाल गौर के बाद तो उन्हें पक्का यकीन था कि उनका ही नाम आएगा, लेकिन शिवराज सिंह का नाम आ गया। सबको पता है श्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले से तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ कितने षड्यंत्र किए जाते थे। जब एक्सपोज हो गए तो केंद्र की राजनीति में चले गए। हरियाणा के बाद प्रमोशन के साथ पश्चिम बंगाल में फ्री हैंड मिला लेकिन जो बात शिवराज सिंह को पता चली थी वही बात श्री अमित शाह को भी पता चल गई। उन्होंने श्री कैलाश विजयवर्गीय को इंदौर वापस भेज दिया।
इस बार जब पक्का हो गया कि श्री शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा तो श्री कैलाश विजयवर्गीय ने नए कपड़े बनवा लिए थे। जब श्री मोहन यादव का नाम फाइनल हुआ तो सबसे ज्यादा दर्द दूसरी कैलाश विजयवर्गीय को ही हुआ था, और यह सब को पता था। बात वही है जो श्री दिग्विजय सिंह ने लिखा है।
यह दिग्विजय सिंह का स्टाइल है
श्री कैलाश विजयवर्गीय ने जो कुछ भी किया है, वह दिग्विजय सिंह का स्टाइल है। जब मन किया तब, किसी भी नेट पर व्यक्ति का तबला कर दिया और फिर तत्काल पलट कर पार्टी लाइन पर आ गए। चार दिन पहले दिग्विजय सिंह ने जो कुछ जीतू पटवारी के साथ किया था, आज वही कैलाश विजयवर्गीय, डॉ मोहन यादव के साथ कर रहे हैं। वैसे भी मध्य प्रदेश में कहा जाता है कि दिग्विजय सिंह और कैलाश विजयवर्गी की बड़ी गहरी दोस्ती है।
— Bhopal Samachar (@BhopalSamachar) July 1, 2026

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