भोपाल, 15 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कल रात अचानक एक मंत्री से उनके विभाग छीन लिए। यह वही मंत्री है जिन्होंने पिछली कैबिनेट की मीटिंग में कलेक्टर के खिलाफ मुख्यमंत्री के सामने अन्य पांच साथी मंत्रियों के साथ परेड की थी।
MP CM Removes Lakhan Patel from Animal Husbandry Department
मंत्री का नाम श्री लखन पटेल है। श्री पटेल दमोह जिले की पथरिया विधानसभा से दूसरी बार विधायक हैं। वह कैबिनेट नहीं बल्कि राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। मुख्यमंत्री ने उनको पशुपालन एवं डेयरी विभाग और आनंद विभाग का काम दिया था। 4-15 जुलाई 2026 को देर रात सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने गजट नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें पशुपालन एवं डेयरी विभाग का प्रभार लखन पटेल से वापस ले लिया गया। अब यह विभाग मुख्यमंत्री के पास है। श्री पटेल के पास केवल आनंद विभाग रह गया है। एक ऐसा विभाग जिसमें आनंद ही आनंद है, ना तो बजट है और नहीं कर्मचारी हैं। तो कुल मिलाकर श्री लखन पटेल अब बिना विभाग के मंत्री हो गए हैं।
क्या लखन पटेल बेलगाम हो गए थे
भारतीय जनता पार्टी में इस प्रकार के फैसले नहीं होते। यदि कोई मंत्री गलती कर रहा होता है तो उसे मंत्रिमंडल विस्तार में बाहर कर दिया जाता है। यदि बहुत जरूरी भी हो जाता है तो, एक मौखिक व्यवस्था दे दी जाती है कि मंत्री अपने विभाग का काम नहीं देखेंगे। सवाल उठता है कि फिर ऐसा क्या हुआ जो श्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग का काम आधिकारिक तौर पर वापस लेना पड़ा। क्या श्री लखन पटेल सरकार और संगठन के नियंत्रण के बाहर चले गए थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि, आधी रात को गजट नोटिफिकेशन करना पड़ा।
लखन पटेल ने क्या गलती की
लखन पटेल आखरी बार सुर्खियों में तब आए थे जब 7 जुलाई को कैबिनेट की मीटिंग के बाद डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, गौतम टेटवाल, लखन पटेल और राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के खिलाफ मुलाकात की थी। यह एक प्रकार का बड़ा विरोध प्रदर्शन था, लेकिन श्री लखन पटेल को विभाग से हटाने का कारण यह नहीं है।
पटेल साहब दिल्ली को चैलेंज कर बैठे थे
दिल्ली के सूत्रों का कहना है कि, केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर करने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि, गौशालाओं और मध्य प्रदेश में दुग्ध क्रांति के अभियान में लखन पटेल एक अड़ंगा बन गए थे। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों का पालन तक नहीं कर रहे थे। यहां तक की उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व की ओर से विभागीय संपर्क के समक्ष चुनौती प्रेस कर दी थी, कि उनके विभाग में उनकी मर्जी के बिना कुछ नहीं हो सकता और वह संगठन या संघ नहीं बल्कि अपनी नीतियों का पालन करते हैं। कहते हैं की राजनीति में अहंकारी होना तो खतरनाक है ही लेकिन अहंकार भरे शब्द बोलना आत्मघाती होता है। पटेल साहब के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। 24 घंटे के भीतर उनको विभाग से बाहर कर दिया गया।

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