भोपाल, 9 जुलाई 2026: लोकायुक्त पुलिस ने विदिशा में एक पटवारी को रिश्वत लेते हुए रहेंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पटवारी पारिवारिक जमीन के बंटवारा, नामांतरण और फौती प्रकरण में नियम के अनुसार कार्रवाई करने के बदले में भी रिश्वत की मांग कर रहा था। उम्मीद थी कि सातवां वेतनमान की बात कर्मचारी भ्रष्टाचारी नहीं करेंगे लेकिन असल में उल्टा हुआ है। सातवां वेतनमान के बाद कर्मचारी और अधिक रिश्वत की मांग करने लगे हैं। जो काम पहले 5000 में हो जाता था उसके लिए 50000 की मांग की जा रही है।
ईमानदारी से काम करने के बदले ₹30000 रिश्वत मांगी
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, विदिशा के काठी मोहल्ला निवासी प्रमेन्द्र धाकड़ ने 6 जुलाई को लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि नटेरन तहसील में पदस्थ पटवारी संदीप यादव पारिवारिक भूमि के बंटवारा, नामांतरण और फौती संबंधी प्रकरण में कार्रवाई करने के बदले 30 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है।
पटवारी ने प्राइवेट ऑफिस में रिश्वत की रकम प्राप्त की
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले का सत्यापन कराया। जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर गुरुवार को योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप की कार्रवाई की गई। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी को उसके निजी कार्यालय में 30 हजार रुपए दिए, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
पटवारी संदीप यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज
आरोपी पटवारी संदीप यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा-7 के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में यदि संदीप यादव दोषी पाए जाते हैं तो डिपार्टमेंट द्वारा उनको बर्खास्त कर दिया जाएगा। फिलहाल जांच में सहयोग करने की शर्त पर उनको जमानत दे दी गई है।

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