सस्पेंडेड सब इंजीनियर का खुलासा: नीचे कमीशन और ऊपर सूटकेस जाता है, मेरे पास सबूत है

Updesh Awasthee
भोपाल, 9 जुलाई 2026:
राइफल वाला फोटो वायरल हो जाने के बाद भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड किए गए जनपद पंचायत के सब इंजीनियर सतीश समेले ने मीडिया के सामने आकर अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार करते हुए कहा कि, मैं अकेला नहीं हूं बल्कि पूरे डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार चलता है। ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव से लेकर जिला स्तर तक सबको कमीशन चाहिए और भोपाल वालों को सूटकेस जाता है। सतीश ने कहा कि मेरे पास सबूत है और मैं हाईकोर्ट में पेश करूंगा। सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल हैं।

पंचायती राज में सब इंजीनियर, वसूली एजेंट बनकर रह गए हैं: सतीश समेले

मध्यप्रदेश के सतना में वित्तीय अनियमितताओं समेत कई शिकायतों के बाद निलंबित किए गए मझगवां जनपद पंचायत के संविदा उपयंत्री सतीश समेले गुरुवार को पहली बार मीडिया के सामने आए। समेले का कहना है कि उनसे भी अधिकारियों के लिए वसूली कराई गई और इसके ऑडियो, वीडियो समेत अन्य सबूत उनके पास हैं, जिन्हें वह हाईकोर्ट में पेश करेंगे। समेले ने आरोप लगाया कि सब इंजीनियर अब वसूली एजेंट बनकर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद भी इस व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं और उनसे भी वसूली कराई गई। कब-कब चंदा हुआ और किस तरह पैसा नीचे से ऊपर तक पहुंचा, इसके ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड उनके पास हैं। उनका दावा है कि ये सभी सबूत वह हाईकोर्ट में पेश करेंगे।

कहा- कौन माई का लाल कमीशन नहीं खाता

समेले ने कहा, "कौन माई का लाल है जो पैसा नहीं लेता। अगर कोई नहीं लेता तो हनुमान जी के सामने अपने बेटे की कसम खाए, तब मैं मान जाऊंगा।" उनका दावा है कि निर्माण कार्यों में नीचे से ऊपर तक अलग-अलग स्तर पर कमीशन तय रहता है। उन्होंने अपने ऊपर लगे कमीशन लेने के आरोपों को भी निराधार बताया। उनका कहना है कि ईएमएफ, ग्रांट और अन्य मद के कार्यों में 10 से 15 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता है। उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) से लेकर भुगतान तक कई स्तरों पर पैसा देना पड़ता है।

दावा- हर स्तर पर तय है कमीशन

समेले यह भी बताया कि सरपंच, सचिव, जीआरएस, सब इंजीनियर, सहायक यंत्री और जनपद स्तर तक कमीशन का प्रतिशत पहले से तय रहता है। सतीश समेले उन्हें कमीशन का प्रतिशत भी बताया:-
सरपंच : 10%
सचिव : 5%
जीआरएस : 3%
सब इंजीनियर : 5%
सहायक यंत्री : 2%
जनपद सीईओ : 2 से 3%

बोले- भोपाल भेजे जाते हैं सूटकेस

सतीश समेले ने आरोप लगाया कि जिले, कमिश्नरी और भोपाल से निरीक्षण के लिए आने वाले अधिकारियों के लिए भी "सूटकेस" भेजे जाते हैं। उनका कहना है कि पूरी व्यवस्था कमीशन पर आधारित है। समेले ने कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पूरे सिस्टम को बचाने की कोशिश है। उनका दावा है कि हाईकोर्ट में सभी प्रमाण पेश कर बताएंगे कि किस तरह वसूली होती है और सब इंजीनियरों को बलि का बकरा बनाया जाता है। उनका आरोप है कि भोपाल तक के अधिकारी भी इस व्यवस्था का हिस्सा हैं।

पहले बंदूक लेकर निरीक्षण करने पर हुई थी कार्रवाई

सतीश समेले मझगवां जनपद पंचायत की हिरौंदी ग्राम पंचायत में आरईएस के संविदा उपयंत्री थे। उनके खिलाफ सरपंचों, सचिवों और ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि वह निर्माण कार्यों के निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर जाते थे। जिला पंचायत सीईओ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। समेले ने बंदूक साथ ले जाने की बात स्वीकार की थी, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं माना गया। इसके बाद उन्हें पहले कार्यालय से अटैच किया गया और बाद में निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई। इसके खिलाफ उन्होंने मीडिया में आकर बयान दिया और अपने डिपार्टमेंट से बगावत का ऐलान कर दिया।

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