शिवपुरी के सांख्य सागर मामले में हाईकोर्ट ने 111 करोड़ का हिसाब मांगा, मंत्रालय के अधिकारी तलब

Updesh Awasthee
ग्वालियर, 15 जुलाई 2026:
शिवपुरी शहर के जल प्रबंधन के लिए 1915 के आसपास बनाए गए रेनवाटर स्टॉप डैम्स में से एक "सांख्य सागर" जिसको आजकल फैशन में सांख्य सागर झील कहा जाने लगा है, के मामले में हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश की ग्वालियर बेंच ने पिछले 111 करोड़ का हिसाब मांगा। 191 करोड़ का बजट पास नहीं होने दिया। CMO से लेकर माधव टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर तक को फटकार लगाई, अलका उपाध्याय का हलफनामा ना मंजूर कर दिया और मंत्रालय से वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया है। 

हाई कोर्ट ने कहा कि पहले यह बताओ - 111 करोड़ कहां गए

सुनवाई के दौरान विशेष जांच दल (SIT) ने रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में झील को बचाने और सीवर रोकने के लिए 191.24 करोड़ रुपए के नए बजट की सिफारिश की गई थी। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सीवरेज लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के लिए पहले ही 111 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हुआ। ऐसे में नया बजट किस आधार पर मांगा जा रहा है। 

नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव हाजिर हों

कोर्ट ने कहा कि पहले यह तय किया जाए कि 111 करोड़ रुपए की बर्बादी के लिए कौन जिम्मेदार है। जब तक दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक नए बजट पर विचार नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव को 27 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर दोषी अधिकारियों की सूची और पूरा रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। आज की तारीख में श्री संजय दुबे नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव हैं। अब देखना है कि क्या श्री संजय दुबे वह फाइल लेकर कोर्ट में हाजिर होंगे, जिनको उनके पहले वाले अधिकारियों ने छुपाया था।

अल्का उपाध्याय का हलफनामा स्वीकार नहीं

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना से जुड़ी तत्कालीन अधिकारी अल्का उपाध्याय का हलफनामा सरकारी वकील के माध्यम से स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्हें खुद या अपने निजी वकील के जरिए कोर्ट में पक्ष रखना होगा। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि जांच में जो अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनसे परियोजना में हुए नुकसान की राशि वसूली जाएगी।

माधव टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर हरिओम को हाई कोर्ट ने फटकारा

सुनवाई के दौरान माधव टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर हरिओम भी कोर्ट में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि वे पुराने अधिकारियों की जानकारी जुटा रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि मामला वर्तमान में झील को हो रहे नुकसान का है। मौजूदा जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि दबाव के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है तो विभाग के उच्च अधिकारी को बुलाया जा सकता है। हालांकि डिप्टी डायरेक्टर ने खुद कार्रवाई करने की बात कही। कोर्ट ने उन्हें 15 दिन का समय दिया है।

सीएमओ यशवंत राठौर हाई कोर्ट में जवाब ही नहीं दे पाए

शिवपुरी नगर पालिका के सीएमओ यशवंत राठौर भी कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने नाले की तस्वीरें प्रस्तुत कीं, जिनमें गंदा पानी सीधे सांख्य सागर झील में जाता दिखाई दिया। जब कोर्ट ने निगरानी रिपोर्ट मांगी तो सीएमओ कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि सीएमओ खुद जिम्मेदारी लेने के बजाय पूरी जिम्मेदारी सेनेटरी इंस्पेक्टर पर डाल रहे हैं। इसके बाद सीएमओ ने अदालत में भरोसा दिया कि आगे से वह स्वयं पूरे मामले की निगरानी करेंगे।

27 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा।
दोषी अधिकारियों की सूची और पूरा रिकॉर्ड सीलबंद लिफाफे में पेश करना होगा।
कोर्ट तय करेगा कि 111 करोड़ रुपए की बर्बादी के लिए किन अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई और राशि की वसूली की जाएगी।

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!