भोपाल समाचार, 4 जुलाई 2026: कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा चुनाव 2028 में कांग्रेस पार्टी के सीएम कैंडिडेट श्री जीतू पटवारी का चुनावी भविष्य अब वीर भारत व्यास के सचिव श्री राम तिवारी के हाथ में आ गया है। तिवारी ने पटवारी को मानहानि का नोटिस दिया है और उनके वकील ने कहा है कि क्रिमिनल और 5 करोड़ का सिविल मुकदमा ठोका जाएगा।
'Jitu Patwari's Future Is in Shri Ram's Hands': Defamation Notice Triggers Political Storm
श्रीराम तिवारी की ओर से उनके अधिवक्ता श्री हरीश मेहता ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि, उन्होंने कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी को मानहानि का नोटिस दिया है। यह नोटिस वीर भारत न्यास को भूमि आवंटन मामले को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में "घोटाला" बताने को लेकर है। इसमें श्री पटवारी ने मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्री राम तिवारी का नाम भी लिया था। मतलब उन्हें इस घोटाले में शामिल बताया था। अधिवक्ता श्री मेहता ने बताया कि हमने अपने नोटिस में श्री जीतू पटवारी को संभावित मुकदमे बाजी से बचने का मौका दिया है। कहा है कि वह अपने इस बयान के लिए माफी मांगे और माननीय के बदले में 5 करोड रुपए अदा करें। श्री मेहता ने यह भी बताएं कि उनके क्लाइंट को 5 करोड़ रुपए का लालच नहीं है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यह रकम समाजसेवी संस्था को दे दी जाएगी।
जीतू पटवारी का बयान जिस पर मानहानि का नोटिस दिया गया
— Adhiraj Awasthi (@AdhirajOnline) June 27, 2026
श्री राम तिवारी के अधिवक्ता हरीश मेहता का बयान
भोपाल, मध्य प्रदेश: अधिवक्ता हरीश मेहता ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा वीर भारत न्यास पर लगाए गए 500 करोड़ के घोटाले के आरोप के मामले पर कहा, “कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने 26 जून 2026 को दिल्ली में एक प्रेस वार्ता की थी। और उस प्रेस वार्ता में वीर… pic.twitter.com/VadyRlsl40
— IANS Hindi (@IANSKhabar) July 4, 2026
पटवारी ने माफी नहीं मांगी तो तिवारी क्या कर लेंगे?
जैसा कि अधिवक्ता श्री हरीश मेहता ने बताया कि, श्री जीतू पटवारी के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल दोनों कैसे किए जाएंगे। ऐसी स्थिति में जीतू पटवारी यदि न्यायालय द्वारा दोषी घोषित किए गए। तो वह अपने आप ही चुनाव के लिए अयोग्य घोषित हो जाएंगे। विधानसभा चुनाव 2028 को सिर्फ ढाई साल बाकी है। मतलब यदि यह मामला जुलाई 2026 के अंत तक कोर्ट में लगा दिया गया तो इसकी अंतिम सुनवाई 2028 के चुनाव के आसपास ही होगी। यदि कोई धुरंधर वकील, श्री पटवारी के समर्थन में आ भी गया तो मामले को साल-6 महीने आगे खींचा जा सकता है। यदि किसी तरह चुनाव लड़ भी लिए तो उनकी सीट से उपचुनाव होने की संभावना है।
अब देखना यह है कि जीतू पटवारी इस मामले में क्या करते हैं। समाचार के लिखे जाने तक श्री जीतू पटवारी की ओर से कोई बयान नहीं आया है। समाचार में श्री पटवारी के दूसरी घोषित होने की संभावना इसलिए व्यक्त की गई है क्योंकि जब पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने इस मामले को गलत बताया, और दलालों के दिमाग की उपज बताया, तब भी श्री जीतू पटवारी ने इसका कोई खंडन नहीं किया था। यहां तक कि उनकी ओर से, उनकी टीम के लोगों ने भी कोई खंडन नहीं किया था।

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