इंदौर/जबलपुर, 3 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा आयोजित राज्य वन सेवा भर्ती परीक्षा 2023 (State Forest Service Recruitment 2023) एक बार फिर कानूनी विवादों के घेरे में है। इंदौर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस भर्ती प्रक्रिया के तहत की जा रही नियुक्तियों को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन (Subject to final court order) कर दिया है। यह आदेश राज्य में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। नीचे इस पूरे कानूनी विवाद की विस्तृत न्यूज़ रिपोर्ट दी गई है:
MPPSC State Forest Service Recruitment 2023 legal controversy and High Court intervention
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विदिशा निवासी याचिकाकर्ता विक्रान्त सिंह चौधरी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के दो विवादित प्रश्नों से शुरू हुआ, जिन पर आपत्ति के बावजूद आयोग ने सुधार नहीं किया और याचिकाकर्ता को मात्र दो अंकों से अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया। इसके बाद इंदौर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के अंतरिम आदेश पर याचिकाकर्ता मुख्य परीक्षा (Mains) में शामिल हुआ और सफल भी रहा। हालांकि, साक्षात्कार (Interview) के दौरान आयोग ने कथित तौर पर नियम विरुद्ध आचरण किया, जिसके बाद अब Indore High Court order on MPPSC Forest Service interview marks और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर विधिक प्रश्न खड़े हो गए हैं।
Discrepancy in MPPSC main exam deleted questions bonus marks and 12 marks issue
इस मामले में सबसे बड़ा तकनीकी विवाद मुख्य परीक्षा के डिलीट किए गए प्रश्नों के अंकों को लेकर है। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि आयोग ने हलफनामे में स्वीकार किया है कि मुख्य परीक्षा के 4 प्रश्न डिलीट किए गए थे, जिसके बदले 12 अंक दिए जाने थे। लेकिन नियमों के विपरीत, इन 12 अंकों को मुख्य परीक्षा के बजाय प्रारंभिक परीक्षा के अंकों में जोड़ दिया गया। आयोग ने सिंगल बेंच को यह जानकारी दी कि याचिकाकर्ता साक्षात्कार में फेल है, जबकि नियमों के अनुसार साक्षात्कार में सफल होने के लिए कोई न्यूनतम अंक (Minimum marks) निर्धारित ही नहीं हैं। इसी विरोधाभास के कारण सिंगल बेंच द्वारा याचिका खारिज होने के बाद मामला डिवीजन बेंच में पहुँचा।
Indore High Court Division Bench stays finality of MPPSC waiting list appointments
अगस्त 2025 में 'आर.पी.एस. लॉ एसोसिएट्स' के माध्यम से दायर Writ Appeal WP/2366/2025 पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट को अवगत कराया गया कि जब अपील लंबित थी, तब आयोग ने प्रतीक्षा सूची (Waiting list) से तीन ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी जिनके अंक याचिकाकर्ता के बराबर थे। आयोग द्वारा इन नए नियुक्त अभ्यर्थियों को पक्षकार बनाने की अर्जी को कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि "थर्ड पार्टी इंटरेस्ट" अपील के दौरान जानबूझकर पैदा किया गया है। वर्तमान में, legal challenges to MPPSC exam irregularities को देखते हुए कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ये सभी नियुक्तियां रिट अपील के अंतिम फैसले पर निर्भर करेंगी।
Arguments of Senior Advocate Rameshwar Singh Thakur in MPPSC Forest Service case
3 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, अभिलाषा लोधी और कृष्णा रोहडा ने कोर्ट को बताया कि आयोग ने सिंगल बेंच को गुमराह करने वाला बयान दिया था। उन्होंने दलील दी कि जब चयन परीक्षा के नियमों में बोनस अंक का प्रावधान नहीं है और न ही इंटरव्यू के लिए न्यूनतम पासिंग मार्क्स तय हैं, तो याचिकाकर्ता को किस आधार पर नियुक्ति से बाहर रखा गया? कोर्ट ने लोक सेवा आयोग के इस कृत्य को गंभीरता से लेते हुए प्रतीक्षा सूची से चयनित अभ्यर्थियों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। MPPSC State Forest Service 2023 recruitment case update यह है कि अब आयोग और राज्य सरकार को इन विधिक खामियों पर जवाब देना होगा।
यह मामला राज्य वन सेवा के रिक्त पदों पर भर्ती की शुचिता और MPPSC के परीक्षा नियमों की व्याख्या पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल बन सकता है। मान सम्मान की शब्दों का प्रयोग किया जिसके कारण उसको मुझे समझना चाहिए ठीक है एक बार लड़की की है।

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