भोपाल, 4 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश के दतिया में उप चुनाव की घोषणा हो गई है। भाजपा की बात क्या करना, खबर तो कांग्रेस से आ रही है। कहां जा रहा है कि राजेंद्र भारती के बेटे को टिकट देने से पब्लिक की सद्भावना का लाभ मिलेगा। समझ में यह नहीं आ रहा है कि न्यायालय द्वारा भ्रष्टाचार के अपराधी घोषित किए गए नेता के प्रति लोगों में सद्भावना क्यों होगी? क्यों कुछ लोगों को लगता है कि भ्रष्टाचार का अपराधी घोषित होने के बाद जनता फिर से राजेंद्र भारती पर भरोसा करेगी।
Datia Bypoll: Why Sympathy for a Convicted Corruption Offender?
उपचुनाव में जनता की सद्भावना का लाभ तब मिलता है जब, चुने हुए विधायक का निधन हो जाए अथवा इस प्रकार की कोई स्थिति बनी हो। यहां तो राजेंद्र भारती जी भ्रष्टाचार के दोषी घोषित हुए हैं। उनको धोखाधड़ी की अपराध में 3 साल जेल की सजा सुनाई गई है। कल तक वह केवल आरोपी थे, इसलिए जनता उनको निर्दोष मानकर चल रही थी। अब न्यायालय में दोषी घोषित हो चुके हैं। सजा घोषित हो चुकी है। जमानत पर रिहा हुए हैं। क्या इतना सब होने के बाद भी जनता विश्वास करेगी, सद्भावना रखेगी। चुनाव प्रचार में भ्रष्टाचार के दोषी को अपना नेता स्वीकार करेगी और क्या ऐसे व्यक्ति के कहने पर उसके बेटे को वोट देगी?
कांग्रेस किस मुंह से टिकट देगी?
उनके ऊपर पद का दुरुपयोग करने और अपनी फैमिली के फायदे के लिए पावर का मिसयूज करने का आरोप है। समझ में यह नहीं आ रहा है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस जो आरोप लगाकर मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग रही है, वहीं कांग्रेस इस प्रकार के मामले के अपराधी को टिकट कैसे दे सकती है। ऐसा करके तो कांग्रेस, यह प्रमाणित कर देगी कि वह भ्रष्टाचार करने वाले नेताओं को संरक्षण देती है। यदि कोर्ट से सजा मिल भी जाए, यदि नेता चुनाव के लिए अयोग्य घोषित हो जाए तो उसके बेटे को टिकट देंगे, लेकिन भ्रष्टाचार को संरक्षण करेंगे?
रोने वालों को कोई वोट नहीं देता
कांग्रेस के नेताओं को एक बात और समझ लेना चाहिए। रोने वालों को कोई वोट नहीं देता। चुनाव आयोग हमारी नहीं सुनता, सरकार हमारी नहीं सुनती, कोर्ट हमारी नहीं सुनता, मीडिया हमारी नहीं सुनती, इस प्रकार छाती पीटने से राजनीति में कोई लाभ नहीं होता। पब्लिक उसके पीछे खड़ा होना पसंद करती है, जिसके अंदर शक्ति होती है और जो यह साबित कर देता है कि, वह सामने वाले की तुलना में अधिक दयालु और न्याय प्रिय है। सोशल मीडिया का इनफ्लुएंसर होना और जनता की नेता होने में अंतर होता है।

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