भोपाल में कचरा कलेक्शन का पैसा नगर निगम लेगा और सजा सोसायटी को मिलेगी

Updesh Awasthee
भोपाल, 4 जुलाई 2026
: कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा ने पर्यावरणीय प्रबंधन समिति की बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया है कि, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार रेजिडेंशियल सोसाइटीज के खिलाफ कार्रवाई शुरू करें। कलेक्टर ने आरडब्ल्यूए को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की कॉपी नहीं भेजी लेकिन SDM को एक्शन के निर्देश दे दिए हैं। मजे की बात देखिए, भोपाल में कचरा कलेक्शन के लिए नगर निगम पैसा लेता है, लेकिन इसी कचरे के लिए सजा रेजिडेंशियल सोसायटी को मिलेगी। थोड़ी बहुत नहीं, 25000 से लेकर 5 लाख तक का फाइन और नई सुधरी तो संपत्ति की कुर्की हो जाएगी।

पर्यावरणीय प्रबंधन समिति की बैठक में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में किए गए बदलावों के आधार पर प्रकरण बनाए जाना चाहिए। इसमें प्रदूषण फैलाने पर कितनी पेनाल्टी लगाई जा सकती है? उसका फार्मूला भी दिया हुआ है। कुछ मामलों में प्रकरण पर्यावरण विभाग के सचिव स्तर तक भी जाने की बात कही गई है। सॉलिड वेस्ट का निष्पादन नहीं करने पर 50 हजार से 5 लाख तक का जुर्माना लग सकता है। सीवेज का ट्रीटमेंट नहीं करने पर तो राशि कई गुना बढ़ जाती है। इस राशि का भुगतान न करने पर कॉलोनी की सार्वजनिक संपत्ति भी कुर्क की जा सकती है। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूरे देश के लिए एक गाइडलाइन

आदमपुर छावनी खंती में कचरे के पहाड़ खड़े होने और वहां प्रदूषण फैलने का मामला सुप्रीम कोर्ट में गया था। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में इसके आधार पर पूरे देश के लिए एक गाइडलाइन बनाई है। एनवायर्नमेंट प्रोटेक्शन एक्ट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स -2026 के तहत बनी इस गाइडलाइन में अफसरों और जनप्रतिनिधियों को भी जिम्मेदार बनाया गया है।

रजिस्ट्रेशन का जिम्मा संबंधित एसडीएम पर
कलेक्टर ने कहा कि जिन कॉलोनियों में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) पंजीकृत नहीं हैं, वहां आरडब्ल्यूए का पंजीयन कराने की जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम की होगी। यहां पर इनका पंजीयन कराया जाए। एक महीने के भीतर इनका रजिस्ट्रेशन हो सके। इसके लिए वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी भी इसमें रुचि लें। इस पर नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को इसका सर्वे कराकर सख्ती से पालन कराने के लिए कहा गया है।

900 कॉलोनियां : इन सभी पर 3R का नियम
भोपाल की 900 से ज्यादा ऐसी कॉलोनियों में, जहां रोज 100 किलो या उससे अधिक कचरा निकलता है, रिसायकल, रिड्यूस और रियूज (3R) का नियम अनिवार्य होगा। गीले कचरे से कंपोस्ट बनाना, सीवेज के पानी का बागवानी में उपयोग करना होगा। ई-वेस्ट, मेडिकल कचरा अलग एकत्र कर नगर निगम को देना होगा। उल्लंघन पर पहले स्पॉट फाइन लगेगा। इसके बाद पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन कर आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
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