भोपाल, 4 जुलाई 2026: कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री दिग्विजय सिंह 80 साल के होने जा रहे हैं लेकिन पॉलिटिक्स के ग्राउंड में उनके समर साल्ट 38 साल के यूथ कांग्रेसी जैसे हैं। पटवारी की टीम ने जैसे ही हमला किया और हाई कमान ने पटवारी के पीछे आकर खड़ा हो गया तो तत्काल अयोध्या की यात्रा का ऐलान कर दिया। फिर अपने घर एक पोस्टर लगा दिया। इस पर लिखा है कि "मेरे घर चंदा चोरों का प्रवेश निषेध है। अब मजे की बात देखिए, इस लाइन का दूसरा मतलब यह है कि पोस्टर लगाने से पहले तक दिग्गी राजा के घर चंदा चोरों का बे रोक-टोक आना जाना था।
चंदा चोरों का प्रवेश निषेध से पैदा हुए सवाल
- चंदा चोरों का दिग्विजय सिंह के घर आना जाना क्यों था?
- क्या चंदा चोरों के अलावा बाकी के विश्व हिंदू परिषद नेता और संघ के स्वयंसेवक दिग्विजय सिंह के घर आ सकते हैं?
- जब कांग्रेस के किसी नेता ने नहीं दिया तो दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के लिए चंदा दिया ही क्यों था?
- दिग्विजय सिंह टू पंढरपुर के भक्त हैं, अयोध्या का राम मंदिर आंदोलन राजनीतिक था, तो फिर दिग्विजय सिंह ने चंदा क्यों दिया?
- क्या दिग्विजय सिंह का सकते हैं कि अयोध्या का राम मंदिर आंदोलन राजनीतिक नहीं था?
- दिग्विजय सिंह से राम मंदिर के लिए चंदा लेने कौन आया था?
- क्या उन लोगों का अभी भी दिग्विजय सिंह के घर आना जाना है?
- दिग्विजय सिंह जब चाहे तब पार्टी लाइन के खिलाफ अपनी सनातनी आजादी का उपयोग क्यों करते हैं?
- क्या दिग्विजय सिंह की अयोध्या यात्रा को कांग्रेस की मंजूरी है?
- यदि यात्रा गैर राजनीतिक है तो क्या इस यात्रा में राजनीति से जुड़े हुए लोगों के शामिल होने पर निषेध रहेगा?
- दिग्विजय सिंह अभी से यात्रा क्यों नहीं शुरू कर रहे हैं? दतिया चुनाव के बाद क्यों?
- राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा में प्रतिदिन 35 किलोमीटर पैदल चले थे, दिग्विजय सिंह भी उनके साथ थे। अब अयोध्या यात्रा में प्रतिदिन 15 किलोमीटर क्यों चलेंगे। यह कौन सी पॉलिटिक्स है।
अयोध्या में श्री राम मंदिर के दान पत्र में गड़बड़ी और चोरी को लेकर पूरे देश में आक्रोश की स्थिति है, इसमें कोई डिबेट नहीं है लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि, इस मुद्दे पर भाजपा और विश्व हिंदू परिषद से नाराज लोगों ने श्री दिग्विजय सिंह को अपना नेता मान लिया है। श्री दिग्विजय सिंह बड़े चतुर खिलाड़ी हैं, वह राम मंदिर मुद्दे के नाराज लोगों के स्वयंभू नेता हो गए हैं। उन्होंने श्री राम मंदिर के निर्माण में चंदा दिया था और इसकी उन्हें रसीद भी मिली थी। मतलब उनके चंदा में कोई घपला नहीं हुआ है, लेकिन वह आवाज उठा रहे हैं।
श्री दिग्विजय सिंह ने मीडिया बाइट में कहा कि, वह उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे। यह यात्रा लगभग 1000 किलोमीटर की होगी। मजे की बात यही कि, श्री दिग्विजय सिंह जिनके नाम का अर्थ है राजनीति, उनका कहना है कि यह यात्रा गैर राजनीतिक होगी। श्री सिंह कहते हैं कि मैं अपने ट्विटर और फेसबुक अकाउंट का उपयोग भी नहीं करूंगा, जैसे नर्मदा यात्रा में नहीं किया था। लेकिन हम सब जानते हैं कि नर्मदा यात्रा में सोशल मीडिया पर उनका जबरदस्त प्रचार किया गया था। अब जब पिता पुत्र के लिए इतना सब कुछ कर रहा है तो पुत्र का भी तो धर्म बनता है। "दाता" के अकाउंट से पोस्टिंग नहीं होगी तो क्या हुआ, बाबा साहब का अकाउंट है, और ऐसे हजारों अकाउंट हैं।
राजा साहब ने बिल्कुल ऐसी घोषणा की है जैसे कोई ऐलान करें कि आज से मैं अपनी थाली से नॉनवेज नहीं खाऊंगा।
दिग्विजय सिंह के ऐलान पर प्रतिक्रियाएं
अयोध्या, उत्तर प्रदेश: साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान पर कहा, "कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह विक्षिप्त हो चुके हैं और वो अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। उनकी अवस्था ज्यादा ढल चुकी है, इसलिए वो अपने मानसिक सतुंलन का इलाज कराने का काम करें..."
लखनऊ, उत्तर प्रदेश: मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान पर कहा "उन लोगों के पास क्या काम है? उनके पास कोई काम तो है नहीं, तो यही सब करते हैं, सवाल उठाते हैं। जब इस बात की जानकारी सबको हो गई है कि SIT गठित हो गई है और काम चालू है, तो फिर और क्या चाहते हैं?..."
अयोध्या, उत्तर प्रदेश: महंत सत्येंद्र दास वेदांती ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान पर कहा, "ऐसे लोग जब प्रश्न चिन्ह लगाते हैं तो बड़ा अजीब लगता है कि कैसे जो राम को काल्पनिक कहते थे, जो राम को काल्पनिक बताते थे, अयोध्या को काल्पनिक बताते थे, जो अमेरिका के एक मोहल्ले को अयोध्या बता रहे थे, आज वे सवाल उठाते हैं, बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है..."

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