भोपाल, 4 जुलाई 2026: भोपाल देश के प्रमुख शहरों में से एक है। यह मध्यप्रदेश की राजधानी है, लेकिन रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 की स्थिति राजधानी के सम्मान पर सवाल खड़े कर रही है। प्लेटफॉर्म नंबर 6 से बाहर निकलने वाले यात्रियों के लिए ऑटो स्टैंड लगभग 300 मीटर दूर बना दिया गया है। बारिश के मौसम में बुजुर्ग, दिव्यांग, बीमार मरीज, महिलाएँ, छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवार और भारी सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को खुले रास्ते में भीगते हुए, कीचड़ और जलभराव के बीच पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
एक तरफ मेट्रो निर्माण कार्य चल रहा है, दूसरी ओर स्टेशन के बाहर जलभराव की समस्या है। हमीदिया रोड की ओर निकलते ही पानी भर जाता है। ऐसे में मरीजों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की पीड़ा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
यह सवाल केवल ऑटो स्टैंड का नहीं, बल्कि यात्रियों के सम्मान और मानवीय संवेदनाओं का है।
मैं रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, डीआरएम भोपाल, भोपाल सांसद, महापौर, जिला प्रशासन, नरेला विधायक विश्वास सारंग तथा सभी संबंधित अधिकारियों से मांग करता हूँ कि
1. प्लेटफॉर्म नंबर 6 के प्रवेश द्वार के पास तत्काल कम से कम 25 ऑटो के स्थायी स्टैंड की अनुमति दी जाए।
2. यात्रियों को पिक-अप और ड्रॉप की सुविधा प्लेटफॉर्म नंबर 6 के प्रवेश द्वार तक उपलब्ध कराई जाए।
3. बारिश के मौसम को देखते हुए इस व्यवस्था पर आज ही आदेश जारी किए जाएँ।
राजधानी का रेलवे स्टेशन यात्रियों की सुविधा का प्रतीक होना चाहिए, उनकी परीक्षा का केंद्र नहीं।
"तीन इंजन की सरकार है, लेकिन यात्रियों की सुविधा का इंजन अब भी बंद पड़ा है।"
"भाजपा सरकार विज्ञापनों में 'विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन' दिखाती है, लेकिन ज़मीन पर यात्री अपना सामान कंधों पर ढोते हुए दिखाई देते हैं।"
"विकास की बातें मंचों पर होती हैं, लेकिन प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर जनता आज भी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रही है।"
सरकार से आग्रह नहीं, जवाबदेही की अपेक्षा है। जनता टैक्स सुविधा के लिए देती है, तकलीफ़ उठाने के लिए नहीं।
प्रवीण धौलपुरे, प्रदेश प्रवक्ता, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी।

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