भोपाल समाचार, 18 जुलाई 2026: चुनाव आयोग भी बड़ा चतुर है, ऐसी पॉलिसी बनता है जिसके कारण जनता भ्रम में रहे कि वह ईमानदार है, जबकि असल में चुनाव आयोग नेताओं की मदद कर रहा होता है। दतिया चुनाव में देखिए, पंडित आशुतोष तिवारी और राजा घनश्याम सिंह, दोनों करोड़पति हैं, लेकिन दोनों के पास कैश इन हैंड नहीं है। तो सवाल उठता है कि, दतिया चुनाव में जो भारी भरकम खर्च हो रहा है, वह पैसा कहां से आ रहा है। दोनों की आय का साधन क्या है। चुनाव आयोग प्रत्याशियों से खर्च का हिसाब तो पूछता है लेकिन इनकम का हिसाब नहीं पूछता।
पंडित आशुतोष और घनश्याम राजा की संपत्ति का विवरण
हम यहां पर दोनों प्रत्याशियों द्वारा प्रस्तुत किए गए एफिडेविट के आधार पर दोनों प्रत्याशियों की संपत्ति का विवरण दे रहे हैं। एक नजर इस पर डाल लीजिए फिर अपन मुद्दे की बात करेंगे।
1. चल संपत्ति (Movable Assets):
चल संपत्ति के मामले में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह, भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी से आगे हैं।
आशुतोष तिवारी के पास ₹49,15,137 की चल संपत्ति है। वहीं,
घनश्याम सिंह की कुल चल संपत्ति का मूल्य ₹69,75,477 है।
नकदी और बैंक जमा:
आशुतोष तिवारी के पास ₹1,54,500 नकद और विभिन्न बैंक खातों में लगभग ₹6.87 लाख जमा हैं।
घनश्याम सिंह के पास ₹1,80,000 नकद और बैंक खातों में लगभग ₹5.45 लाख जमा हैं।
वाहन:
आशुतोष तिवारी के पास एक टाटा हैरियर (कीमत ₹28.53 लाख) है।
घनश्याम सिंह के पास दो गाड़ियां हैं (एक बोलेरो (2011 मॉडल) और एक टोयोटा इनोवा (2021 मॉडल, कीमत ₹20 लाख)।
आभूषण:
आशुतोष तिवारी के पास 80 ग्राम सोना (कीमत ₹11.55 लाख) है।
घनश्याम सिंह के पास 240 ग्राम सोना और 600 ग्राम चांदी है, जिसकी कुल कीमत लगभग ₹29.90 लाख है।
हथियार:
आशुतोष तिवारी के पास ₹65,000 मूल्य की दो बंदूकें हैं।
घनश्याम सिंह के पास ₹75,000 मूल्य की एक .315 बोर की राइफल है।
2. अचल संपत्ति (Immovable Assets):
अचल संपत्ति के मामले में दोनों प्रत्याशियों के बीच बहुत बड़ा अंतर है। घनश्याम सिंह की संपत्ति का मूल्य करोड़ों में है।
आशुतोष तिवारी की अचल संपत्ति का कुल वर्तमान बाजार मूल्य ₹1,29,75,443 (लगभग 1.30 करोड़) है। इसके विपरीत,
घनश्याम सिंह की अचल संपत्ति का अनुमानित मूल्य ₹19,38,33,334 (लगभग 19.38 करोड़) है।
कृषि भूमि:
आशुतोष तिवारी की स्वयं की कृषि भूमि का मूल्य ₹33,75,443 है।
घनश्याम सिंह की कृषि भूमि (हिस्सा) का अनुमानित मूल्य ₹3.65 करोड़ है।
गैर-कृषि भूमि और व्यावसायिक भवन:
आशुतोष तिवारी के पास ऐसी कोई संपत्ति नहीं है।
घनश्याम सिंह के पास दतिया गिर्द में गैर-कृषि भूमि (कीमत ₹2.50 करोड़) और दतिया किला परिसर में स्थित मार्केट में हिस्सा (अनुमानित मूल्य ₹9.70 करोड़) है।
आवासीय भवन:
आशुतोष तिवारी के पास ग्वालियर में एक आवासीय भवन है जिसकी कीमत ₹96 लाख है।
घनश्याम सिंह के पास दतिया किला भवन, भवानी विलास, सेवढ़ा किला और अलवर (राजस्थान) में कोठी में हिस्सेदारी है, जिनका कुल मूल्य करोड़ों में है।
3. पारिवारिक संपत्ति (Spouse Assets):
आशुतोष तिवारी की पत्नी (कल्पना तिवारी) के पास ₹44,84,831 की चल संपत्ति (जिसमें ₹43.50 लाख का 312 ग्राम सोना शामिल है) और ₹1,31,37,900 की कृषि भूमि है।
घनश्याम सिंह की पत्नी के पास लगभग ₹70,17,293 की चल संपत्ति है, जिसमें मुख्य रूप से ₹69.60 लाख मूल्य का 580 ग्राम सोना शामिल है। उनके पास ₹14 लाख मूल्य की अचल संपत्ति भी है।
4. देनदारियां और कर्ज (Liabilities):
आशुतोष तिवारी पर ₹11,83,443 का बैंक ऋण (कार लोन) है।
घनश्याम सिंह पर ₹5,63,244 की देनदारी है (LIC ऋण और व्यक्तिगत लोन)। हालांकि, उन पर दतिया किला मार्केट के संबंध में नगरपालिका और सरकारी विभाग के ₹1.24 करोड़ से अधिक के विवादित देय (Disputed Dues) भी लंबित हैं, जो न्यायालय में विचाराधीन हैं।
अब मुद्दे की बात और बड़ा सवाल
जैसा कि शपथ पत्र से स्पष्ट होता है- आशुतोष तिवारी के पास बैंक और नगद मिलाकर करीब आठ लाख रुपए से थोड़ा ज्यादा पैसा है। राजा घनश्याम सिंह इस मामले में पंडित आशुतोष तिवारी से ज्यादा गरीब हैं। उनके पास बैंक और नगद मिलकर ₹700000 से थोड़ा ज्यादा पैसा है। अब सवाल उठता है कि दोनों प्रत्याशी चुनाव कैसे लड़ रहे हैं। जो पैसा वह खर्च कर रहे हैं वह कहां से आ रहा है। जरा इन दोनों के बैंक का लेटेस्ट स्टेटमेंट तो निकलवा कर देखिए। यह लोग अपने बैंक अकाउंट से पैसा निकाल भी रहे हैं या नहीं? यदि चुनावी चंदा मिल रहा है तो वह किस बैंक अकाउंट में जमा किया जा रहा है? हिसाब तो मांगिए। बड़ा सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग, कितना पैसा कहां से आया? यह सवाल पूछता है? आयोग यह सवाल जरूर पूछता है कि- कितना पैसा कहां खर्च किया? लेकिन यह सवाल क्यों नहीं पूछता कि यह पैसा आया कहां से?
- चुनाव आयोग नामांकन फार्म जमा करते समय यह क्यों नहीं पूछ लेता की चुनाव प्रचार के लिए पैसा कहां से लाओगे। लगभग कितना पैसा खर्च करोगे।
- चुनाव आयोग नामांकन फार्म के साथ यह शपथ पत्र क्यों नहीं लेता कि, चुनाव में किसी भी रूप में काले धन का उपयोग नहीं किया जाएगा।
- चुनाव आयोग यह व्यवस्था स्थापित क्यों नहीं करता कि यदि चुनाव में काले धन का प्रयोग पकड़ा जाता है तो ऐसे मामलों का फैसला फास्ट्रेक कोर्ट में 1 महीने के भीतर किया जाएगा।
- चुनाव आयोग यह व्यवस्था स्थापित क्यों नहीं करता कि यदि चुनाव में काला धन पकड़ा जाता है तो, काला धन के साथ पकड़े गए व्यक्ति को 5 साल जेल की सजा और जिस मोटर वाहन में काला धन पकड़ा गया है उसको राजसात कर लिया जाएगा।
- शॉर्ट में बोले तो चुनाव आयोग चुनाव में काले धन की एंट्री पर बैन क्यों नहीं लगाता?
देखिए कितनी चतुराई से ब्लैक मनी के साथ पकड़े गए व्यक्ति का चेहरा छुपा दिया गया। वीडियो में सिर्फ नोट दिखाए। पुलिस वाले भाई साहब गिनती में भी गलती कर रहे हैं।

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