Free legal advice: कभी-कभी कुछ लोग स्वयं भूखे रहकर अपने प्राण त्यागने का प्रयास करते हैं। कभी आमरण अनशन पर बैठ जाते हैं और कभी आंदोलन के आयोजकों द्वारा धोखे से आमरण अनशन पर बिठा दिया जाता है और फिर बाद में आमरण अनशन प्रतिष्ठा का प्रश्न बन जाता है। इस प्रकार की सभी परिस्थितियों में भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत क्या कार्रवाई हो सकती है। ध्यान से पढ़िए ताकि सनद रहे और वक्त जरूरत काम आवे:-
1. भूखे रहकर आत्महत्या का प्रयास
भारतीय न्याय संहिता ने पुराने कानून (IPC) की धारा 309 को समाप्त कर दिया है, जो आत्महत्या के प्रयास को अपराध मानती थी। अतः, यदि कोई व्यक्ति केवल व्यक्तिगत कारणों से भूख द्वारा अपने प्राण त्यागने का प्रयास करता है, तो उसे अब सामान्य रूप से अपराधी नहीं माना जाएगा। जीवन की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन आत्महत्या का प्रयास करना अब अपराध नहीं है।
2. लोक सेवक पर दबाव बनाने के लिए अनशन (धारा 226)
यदि कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक (Public Servant) को उसके आधिकारिक कर्तव्य निभाने से रोकने या मजबूर करने के इरादे से भूख हड़ताल या अनशन के माध्यम से आत्महत्या का प्रयास करता है, तो यह एक विशिष्ट अपराध है:
अपराध: धारा 226 के तहत, लोक सेवक को विवश या प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से आत्महत्या का प्रयास करना दंडनीय है।
दंड: इसके लिए एक वर्ष तक का साधारण कारावास, या जुर्माना, या दोनों, अथवा सामुदायिक सेवा (Community Service) की सजा दी जा सकती है।
3. यदि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भोजन न देकर प्राण लिए जा रहे हों
यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु भूख के कारण होती है और इसमें किसी अन्य का "अवैध लोप" (Illegal Omission) शामिल है, तो कार्रवाई इस प्रकार होगी:
हत्या का मामला (धारा 101/103): यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर (जैसे जेलर द्वारा कैदी को) भोजन देना बंद कर देता है ताकि उसकी मृत्यु हो जाए, तो इसे हत्या (Murder) माना जाएगा।
आपराधिक मानव वध (धारा 100): यदि भोजन न देने का कार्य मौत का कारण बनता है, तो इसे परिस्थितियों के अनुसार आपराधिक मानव वध की श्रेणी में रखा जा सकता है।
अपूर्ण प्रयास (धारा 62): यदि भूख से मृत्यु तो नहीं होती लेकिन व्यक्ति गंभीर रूप से कमजोर हो जाता है, तो भोजन न देने वाले उत्तरदायी व्यक्ति पर हत्या के प्रयास के तहत मामला चलाया जा सकता है।
4. असहाय व्यक्ति की देखभाल में लापरवाही (धारा 357)
यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे असहाय व्यक्ति (बच्चा, मानसिक रूप से अस्वस्थ या बीमार) की देखभाल करने और उसे भोजन आदि की आपूर्ति करने के लिए कानूनी अनुबंध (Contract) से बाध्य है, और वह जानबूझकर ऐसा करने में चूक (omission) करता है:
दंड: उसे तीन महीने तक की जेल या पांच हजार रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
निष्कर्ष: वर्तमान कानून के तहत, यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से अनशन कर रहा है, तो उस पर तब तक कार्रवाई नहीं होती जब तक कि वह किसी सरकारी अधिकारी पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास न करे (धारा 226)। वहीं, यदि किसी को भूखा रखकर मारा जा रहा है, तो जिम्मेदार व्यक्ति पर हत्या या दुष्प्रेरण की धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। लेखक: उपदेश अवस्थी (विधि पत्रकार एवं सलाहकार)।

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