भोपाल, 19 जुलाई 2026: ट्रैफिक टीआई संजय सूर्यवंशी का एक वीडियो व्हाट्सएप पर वायरल हो रहा है। इसमें वह भाजपा नेता से बहस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। भाजपा नेता अभय पंडित उनको धमकी दे रहे हैं और इंस्पेक्टर सूर्यवंशी कह रहे हैं कि वह तो नियम के अनुसार अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। संवाद सुनने में तो अच्छा लगता है लेकिन जब इस मामले को थोड़ा रिवर्स करके देखा तो पता चला कि, विवाद का कोई बड़ा कारण नहीं था लेकिन इंस्पेक्टर सूर्यवंशी ने जबरदस्ती बखेड़ा खड़ा कर दिया। अब भाजपा के नेताजी इंतजार करेंगे कि इंस्पेक्टर सूर्यवंशी कोई गलती करें...। इसे कहते हैं आ बैल मुझे मारा।
इंस्पेक्टर साहब ने नेताजी का ईगो हर्ट कर दिया
तो इस कहानी का घटना स्थल है, पुलिस कंट्रोल रूम वाला तिराहा, समय दोपहर का है और हाई वोल्टेज ड्रामा केवल ढाई मिनट चला। ट्रैफिक इंस्पेक्टर श्री संजय सूर्यवंशी टू व्हीलर पर विदाउट हेलमेट वालों का चालान बना रहे थे। इसी दौरान भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष वहां से निकले। नेताजी ने हेलमेट नहीं पहना था। इंस्पेक्टर साहब ने उनको रोक लिया। पुलिस और पॉलिटिक्स एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं। इसलिए मंडल अध्यक्ष महोदय ने इंस्पेक्टर साहब से गाड़ी छोड़ देने का निवेदन किया लेकिन सब नहीं माने। फिर नेताजी ने अपने नेताजी को फोन लगाया और इंस्पेक्टर साहब से बात करवाने की कोशिश की लेकिन इंस्पेक्टर संजय सूर्यवंशी ने फोन पर बात करने से इनकार कर दिया। इंस्पेक्टर सूर्यवंशी की यह बात नेताजी के नेता जी का ईगो हर्ट कर गई।
इंस्पेक्टर साहब ने नेताजी को FIR की धमकी दे डाली
भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष श्री अभय पंडित कुछ ही देर में मौके पर पहुंच गए। इसके बाद पंडित जी और सूर्यवंशी साहब के बीच में बहस शुरू हो गई। भरे चौराहे पर ढाई मिनट तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा।
- अभय पंडित ट्रैफिक पुलिस पर वाहन चालकों से अवैध वसूली और "चौथ वसूली" करने के आरोप लग रहे हैं।
- ट्रैफिक टीआई संजय सूर्यवंशी बोले कि पुलिस नियमों के तहत कार्रवाई कर रही है और किसी भी तरह की कार्रवाई में हस्तक्षेप उचित नहीं है।
टीआई यह कहते भी सुनाई दे रहे हैं कि पुलिसकर्मियों से बदसलूकी न करें और सरकारी कार्य में बाधा न डालें। नहीं तो केस दर्ज कराएंगे।
इंस्पेक्टर सूर्यवंशी, नेताजी का चालान बनाकर ही माने
ट्रैफिक टीआई संजय सूर्यवंशी ने बताया कि मुझे नहीं पता बहस करने वाले सज्जन कौन थे। मैं केवल अपनी ड्यूटी पूरी कर रहा था। बिना हैलमेट पकड़े गए वाहन चालक के खिलाफ चालानी कार्रवाई कर उसे रवाना किया गया। उसके तीन चालान पूर्व में भी पैंडिंग थे।
अब सोशल मीडिया पर इस मामले में लोग आदर्श वचन कह रहे हैं लेकिन व्यवहारिक बात यह है कि, विवाद का कोई खास कारण ही नहीं था। ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय सूर्यवंशी को भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष से फोन पर बात करनी चाहिए थी। यदि कोई व्यक्तिगत परिचय नहीं था तो विनम्रता के साथ यह कह देना चाहिए था कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करें। वीडियो में इंस्पेक्टर सूर्यवंशी बोल रहे हैं कि, पुलिस नियमों के तहत कार्रवाई कर रही है, लेकिन क्या कोई यह मानने को तैयार है कि ट्रैफिक पुलिस हेलमेट के लिए चालान बनाते समय केवल नियमों के तहत ही कार्रवाई करती है?
क्या कोई विश्वास कर सकता है कि ट्रैफिक डिपार्टमेंट में टाउन इंस्पेक्टर जैसी पोजीशन केवल नियमों के तहत कार्रवाई करने के कारण मिल सकती है? यदि ट्रैफिक पुलिस पॉइंट के आसपास के CCTV कैमरा की रिकॉर्डिंग निकाल कर देखी जाए तो इंस्पेक्टर सूर्यवंशी का सिंघम अवतार पलक झपकते ही गायब हो जाएगा। इंस्पेक्टर साहब का सैलरी अकाउंट और मंथली एक्सपेंस टैली करके देख लें, पता चल जाएगा कि कितना नियम के अनुसार चल रहा है।
बाद पुलिस पर प्रेशर बनाने की नहीं है लेकिन व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने की है। जो मामला वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर का है, उसमें पंगा लेने की क्या जरूरत है। बहस करने की क्या जरूरत है। मोबाइल कैमरे देखते ही जबरदस्ती हीरो बनने की क्या जरूरत है। नियम के अनुसार सिर्फ इतना कहिए कि यह मेरा विषय नहीं है, कृपया मेरे वरिष्ठ अधिकारी से बात करें।

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