भोपाल, 11 जून, 2026: भारतीय स्टेट बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी श्री अनिल कुमार जैन की कमाई के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। उन्होंने 21 महीने में अपनी कमाई को 5 गुना कर लिया। जब उनसे पूछा क्या कि यह चमत्कार कैसे हुआ था उन्होंने बताया कि एक कंपनी ने प्रॉफिट बनाया है। जांच की तो पता चला कि कंपनी के पास कोई प्रोडक्ट ही नहीं है। कंपनी ने कोई कारोबार ही नहीं किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भ्रष्टाचार और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत निश्चित आय से अतिरिक्त कमाई को अपराध की कमाई मानते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत कुर्क कर लिया है।
SBI Executive Under Scanner as Earnings Jump 5x in 21 Months, ED Seizes Properties
यह मामला मूल रूप से सीबीआई, भोपाल द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर से जुड़ा है। सीबीआई ने अनिल कुमार जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(b) के तहत आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) रखने का मामला दर्ज किया था। इसी आधार पर ईडी ने अपनी जांच शुरू की थी। ईडी की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि 1 अप्रैल, 2017 से 31 दिसंबर, 2018 की अवधि के दौरान अनिल कुमार जैन ने 3.01 करोड़ रुपये की संपत्ति एकत्र की थी, जो उनकी ज्ञात वैध आय से लगभग 481% अधिक थी। मतलब 21 महीने में कमाई लगभग 5 गुना हो गई। जांच में पाया गया कि जैन ने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में 2.35 करोड़ रुपये की भारी नकद राशि जमा की थी।
शेल कंपनियों और हवाला का जाल
जैन ने इन नकद जमाओं को अचल संपत्ति की बिक्री का पैसा बताया था, लेकिन इसके समर्थन में वे कोई भी दस्तावेजी सबूत या विश्वसनीय स्पष्टीकरण देने में विफल रहे। जांच में आगे खुलासा हुआ कि:
इन नकद जमाओं को बाद में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में बदल दिया गया था ताकि 'अपराध की कमाई' से और लाभ कमाया जा सके।
अनिल कुमार जैन ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और हवाला ऑपरेटरों के साथ मिलकर अपनी अवैध आय को वैध दिखाने की कोशिश की थी।
इस साजिश के तहत 'मैसर्स एक्सीलेंट इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड' नामक एक शेल कंपनी का सहारा लिया गया, जिसका कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था।
अखिलेश चौधरी जैसे लोगों को इस इकाई का डमी डायरेक्टर बनाया गया था, जिनके माध्यम से फर्जी लेन-देन को अंजाम दिया गया।
वर्तमान में, ईडी ने लगभग 3.01 करोड़ रुपये की सावधि जमा (FDR) को कुर्क किया है, जिन्हें सीधे तौर पर 'अपराध की कमाई' (Proceeds of Crime) माना गया है। ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई इन संपत्तियों को छिपाने, हस्तांतरित करने या निपटाने से रोकने के लिए की गई है, ताकि भविष्य में इन्हें पूरी तरह से जब्त किया जा सके। मामले की आगे की जांच जारी है।

