संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर 50 साल से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 1 जून 2026
: सर्वोच्च न्यायालय ने 1 जून, 2026 को दो महत्वपूर्ण निर्णय सुनाकर दशकों पुराने कानूनी विवादों को सुलझाया है। जहाँ एक ओर संपत्ति के उत्तराधिकार के नियमों को स्पष्ट किया गया।

Property partition suit 50 years old case Supreme Court verdict

यह मामला महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के सप्ती गांव का है, जहाँ Property partition suit 50 years old case Supreme Court verdict के रूप में पहचाने जाने वाला दारूबाई बनाम कमलाबाई विवाद अंततः समाप्त हुआ। स्वर्गीय दाजीबा की मृत्यु के बाद, उनकी संपत्ति (सर्वे नंबर 42/B, 83/B, 146/C और 43/C) पर उनकी दूसरी पत्नी दारूबाई और पहली पत्नी की चार बेटियों के बीच बंटवारे को लेकर 1972 से कानूनी जंग जारी थी। बेटियों ने संपत्ति के 4/5 हिस्से का दावा किया था, जबकि दारूबाई ने पूरी संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार जताया था।

Inheritance rights of daughters vs stepmother under Section 8 

अदालत ने Inheritance rights of daughters vs stepmother under Section 8 के तहत गहराई से विश्लेषण किया। मामला इस सवाल पर टिका था कि दाजीबा की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी संपत्ति को किस रूप में प्राप्त करते हैं। अपीलकर्ता दारूबाई का तर्क था कि वह परिवार की प्रबंधक या 'कर्ता' थीं और उन्होंने कानूनी आवश्यकता के लिए संपत्ति का एक हिस्सा बेचने का समझौता किया था। हालांकि, बेटियों (प्रतिवादियों) ने तर्क दिया कि उत्तराधिकार अधिनियम लागू होने के बाद उनका हिस्सा निश्चित हो चुका था।

Hindu Succession Act Section 19 mode of succession explained: धारा 8 और 19 का प्रभाव

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति अगस्त्य जॉर्ज मसीह की पीठ ने Hindu Succession Act Section 19 mode of succession explained करते हुए कहा कि जब दो या दो से अधिक उत्तराधिकारी धारा 8 के तहत एक साथ उत्तराधिकार प्राप्त करते हैं, तो वे 'tenants-in-common' के रूप में संपत्ति धारण करते हैं। इसका अर्थ है कि उत्तराधिकार प्राप्त होते ही प्रत्येक वारिस का अपना स्वतंत्र और निश्चित हिस्सा हो जाता है, जिसे 'उत्तरजीविता' (survivorship) के पुराने नियमों से नहीं बदला जा सकता।

Difference between joint tenants and tenants in common in Hindu law: न्यायालय की टिप्पणी

न्यायालय ने Difference between joint tenants and tenants in common in Hindu law को स्पष्ट करते हुए कहा कि 'Joint Tenancy' में वारिस का हिस्सा निश्चित नहीं होता, जबकि 'Tenancy-in-common' में प्रत्येक का हिस्सा स्पष्ट होता है। अधिनियम की धारा 19(b) के अनुसार, दाजीबा के वारिसों ने संपत्ति को व्यक्तिगत क्षमता में प्राप्त किया। इसलिए, जैसे ही दाजीबा की मृत्यु हुई, दारूबाई और चारों बेटियों का संपत्ति में 1/5 हिस्सा तय हो गया था।

Powers of Karta in selling separate property of deceased Hindu male: अपीलकर्ता के दावे का खंडन

Powers of Karta in selling separate property of deceased Hindu male पर विचार करते हुए न्यायालय ने माना कि दारूबाई के पास अन्य वारिसों (बेटियों) का हिस्सा बेचने का कोई अधिकार नहीं था। चूंकि संपत्ति व्यक्तिगत उत्तराधिकार के माध्यम से प्राप्त हुई थी, इसलिए 'कर्ता' या 'प्रबंधक' की अवधारणा यहाँ लागू नहीं होती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वारिस के उत्तराधिकार को किसी अन्य की मर्जी पर नहीं छोड़ा जा सकता।

Legal necessity for sale of property by Hindu widow: विधिक आवश्यकता का तर्क

दारूबाई ने दावा किया था कि उन्होंने एक बेटी की शादी के लिए Legal necessity for sale of property by Hindu widow के आधार पर दत्तात्रय को जमीन बेचने का अनुबंध किया था। निचली अदालत ने इसे खारिज कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। न्यायालय ने कहा कि भले ही कोई 'विधिक आवश्यकता' रही हो, एक सह-स्वामी (co-owner) दूसरे सह-स्वामी के हिस्से को उसकी सहमति के बिना नहीं बेच सकता, क्योंकि उनके हिस्से धारा 8 के तहत पहले ही व्यक्तिगत संपत्ति बन चुके थे।

Supreme Court judgment on Hindu Succession Act 1956 Section 8: ऐतिहासिक स्पष्टीकरण

Supreme Court judgment on Hindu Succession Act 1956 Section 8 के माध्यम से यह तय किया गया कि धारा 8 के तहत विरासत में मिली संपत्ति 'हिंदू अविभाजित परिवार' (HUF) की संपत्ति नहीं बनती, बल्कि वह वारिस की व्यक्तिगत और वैधानिक संपत्ति होती है। इस प्रकार, अन्य वंशज या परिवार के सदस्य जन्म के आधार पर इसमें कोई अधिकार प्राप्त नहीं करते।

Supreme Court case Darubai vs Kamalabai 2026 full details: अंतिम फैसला

Supreme Court case Darubai vs Kamalabai 2026 full details के निष्कर्ष में, सर्वोच्च न्यायालय ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए दारूबाई की अपील खारिज कर दी। न्यायालय ने निर्देश दिया कि संपत्ति के 5 समान हिस्से किए जाएं और प्रत्येक वारिस को उसका 1/5 हिस्सा दिया जाए। इसके साथ ही न्यायालय ने आशा व्यक्त की कि 50 साल पुराना यह विवाद अब शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त होगा।

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