भोपाल, 2 जून 2026: मध्य प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग विकास, तरक्की, इनोवेशन, भ्रष्टाचार से मुक्ति इत्यादि के नाम पर पिछले कई सालों से एक सर्किल का चक्कर लगा रहा है। कुछ सालों बाद उसी पॉइंट पर आकर खड़ा हो जाता है, जिसको रिजेक्ट किया था। अब स्कूल शिक्षा मंत्री ने डिसाइड किया है कि स्कूलों में स्टूडेंट को यूनिफॉर्म के लिए डायरेक्ट फंड ट्रांसफर नहीं किया जाएगा बल्कि रेडीमेड यूनिफॉर्म दी जाएगी।
MP School Education Department: Failed Uniform Scam Model Re-Approved by Cabinet
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूर करवा लिया है। शासन की तरफ से पत्रकारों को दी गई सूचना में बताया गया है कि, मंत्रि-परिषद ने शासकीय शालाओं में कक्षा पहली से 8 वीं तक के विद्यार्थियों को सत्र 2026-27 से निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सिली-सिलाई गणवेश प्रदाय करने का निर्णय लिया है। निविदा प्रक्रिया के लिए मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम को अधिकृत किया गया है। शासकीय शालाओं में अध्ययनरत छात्र/छात्राओं को शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पूर्व 2 जोडी गणवेश प्रदाय किया जाना लक्षित है। इससे समय सीमा में विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त गणवेश प्रदाय सुनिश्चित हो सकेगा।
बहुत सारे आंकड़ों और डॉक्यूमेंट नंबर के साथ साबित करने की जरूरत नहीं है क्योंकि वह करोड़ों बच्चे अभी भी मध्य प्रदेश में ही है जिनका पहले रेडीमेड यूनिफॉर्म दी जाती थी। फिर यूनिफॉर्म की क्वालिटी को लेकर सवाल उठने लगे। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा में यूनिफार्म घोटाला हो गया। फिर तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने यूनिफॉर्म की सिलाई का काम स्व सहायता समूह को देना शुरू कर दिया। इसमें भी घोटाला हो गया और तमाम शिकायतें सामने आने लगी। कुछ वीडियो तो अभी भी यूट्यूब और सोशल मीडिया पर मिल जाएंगे। तब सरकार ने परेशान होकर यूनिफॉर्म देना बंद किया और यूनिफॉर्म के लिए एक फिक्स अमाउंट, स्टूडेंट के अकाउंट में डायरेक्ट ट्रांसफर करना शुरू किया।
स्कूल शिक्षा विभाग एक बार फिर भ्रष्टाचार से मुक्ति के नाम पर इस पॉइंट पर आकर खड़ा हो गया है जहां पर पिछली बार घोटाले और भ्रष्टाचार के भयंकर आरोप लगे थे।

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