भोपाल, 9 जून 2026: मध्यप्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर आ रही है। कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म रद्द कर दिया गया है। इस घटनाक्रम ने न केवल कांग्रेस के राज्यसभा जाने के इकलौते मौके को खत्म कर दिया है, बल्कि सियासी गलियारों में इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की एक अचूक और सोची-समझी रणनीति का नतीजा माना जा रहा है।
विधानसभा परिसर में हंगामा, हेमंत और विक्रांत उग्र हुए
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की जांच के दौरान विधानसभा परिसर में दोनों दलों के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे की स्थिति भी बनी। नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और विक्रांत भूरिया ने रिटर्निंग ऑफिसर के कमरे में घुसने की कोशिश की, जिसे पुलिस और विधानसभा के सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया।
क्यों कटा मीनाक्षी नटराजन का पत्ता?
नामांकन रद्द होने की मुख्य वजह हैदराबाद की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी को छिपाना है। मीनाक्षी नटराजन हैदराबाद की 'फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट' की अदालत में चल रहे आपराधिक मामले (Crl. M.P. No.27 of 2025) में 'अभियुक्त संख्या 4' (Accused No. 4) के तौर पर नामित हैं।
सियासी गलियारों में चर्चा: डॉ. मोहन यादव का 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप'?
कांग्रेस के खेमे में इस वक्त बिल्कुल वैसी ही स्थिति है, जैसे बच्चापार्टी क्रिकेट में होती है, जब वह बच्चा पहली बॉल पर आउट हो जाता है, जो क्रिकेट की पूरी किट लाया होता है। वो अंपायर का फैसला मानने को तैयार नहीं होता। चर्चा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की टीम ने नटराजन के खिलाफ इस कानूनी पेच को पूरी बारीकी से ट्रैक किया और सही समय पर इसे चुनावी मैदान में उतारा। जहां एक तरफ सब सोच रहे थे कि विधायकों की खरीद फारोख्त होगी। कांग्रेस ने अपने विधायकों को क्वारेंटाइन करने के लिए फ्लाइट भी बुलवा ली थी। जबकि सीएम डॉ मोहन यादव किसी दूसरे ही ग्राउंड पर खेल रहे थे।

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