MORENA के सिपाही को Gwalior में पीटा, घसीटा, टांग तोड़ी, मार डाला, 2 दिन बाद बॉडी मिली

Updesh Awasthee
ग्वालियर, 4 जून 2026
: पुलिस के सिस्टम पर सवाल खड़ा हो गया है। डिपार्टमेंट की डाक लेकर निकला एक सिपाही, गंतव्य तक नहीं पहुंचा परंतु डिपार्टमेंट ने कोई ध्यान नहीं दिया। 2 दिन बाद उसकी डेडबॉडी मिली। उसे घसीटा गया, मारापीटा गया, टांग तोड़ दी और अत्याधिक खून निकल जाने से उसकी मौत हो गई। 

Morena Constable Found Dead at Gwalior, Murder Probe Intensifies After Chilling Allegations

मूल रूप से मुरैना जिले के अम्बाह-पोरसा के रहने वाले अंकित तोमर उम्र 36 वर्ष वर्तमान में ग्वालियर के सिकंदर कंपू इलाके में रह रहे थे। परिजनों के मुताबिक दो दिन पहले अंकित को किसी विभागीय डाक (सरकारी दस्तावेज) को देने के लिए अपने गृहग्राम पोरसा जाना था। अंकित के भांजे अवध सिंह ने उन्हें पोरसा जाने वाली बस में बैठाने के लिए बस स्टैंड पर छोड़ा था, लेकिन बस में बैठने के बाद से ही अंकित का मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहा था और वे अपने गांव भी नहीं पहुंचे। चिंतित परिजन उनकी तलाश कर रहे थे।

मुरैना के अंकित तोमर की डैडबॉडी 2 दिन बाद राहगीर ने देखी

गुरुवार सुबह राहगीरों ने नवीन लोहा मंडी के पास सुनसान जगह पर वर्दी पहने एक पुलिसकर्मी का शव पड़ा देखा, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई। सीएसपी और थाना प्रभारी भारी बल के साथ मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में आरक्षक के शरीर पर घसीटे जाने और गंभीर चोट के निशान मिले हैं। मृतक अंकित तोमर के बाएं (लेफ्ट) पैर का टखना बुरी तरह टूटा हुआ था और घटनास्थल पर पैर से भारी मात्रा में ब्लीडिंग (खून का रिसाव) होना पाया गया है। शव की स्थिति को देखकर आशंका जताई जा रही है कि या तो उनके साथ कोई हिंसक वारदात हुई है या फिर किसी अज्ञात भारी वाहन ने उन्हें बेरहमी से रौदा है।

2018 में मिली थी अनुकंपा नियुक्ति

अंकित के पिता रामलखन सिंह तोमर भी पुलिस विभाग में थे। वर्ष 2016 में पिता रामलखन तोमर की असामयिक मृत्यु हो गई थी। पिता के निधन के बाद अंकित तोमर को साल 2018 में मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। वे पिछले 8 साल से विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

पुलिस का कहना
गंभीर चोट के कारण अत्यधिक खून बहना मौत का तात्कालिक कारण लग रहा है। फॉरेंसिक (FSL) की टीम ने मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं। मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम (PM) के लिए भेज दिया गया है। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट और आरक्षक के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालने के बाद ही साफ होगा कि यह सोची-समझी हत्या है या कोई सड़क हादसा। पुलिस की टीमें हर बिंदु पर बारीकी से जांच कर रही हैं।

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