भोपाल, 11 जून 2026: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए रिटर्निग ऑफिसर श्री अरविंद शर्मा के फैसले के खिलाफ कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल कर दी गई है। बताया था कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, Meenakshi Natarajan challenges Rajya Sabha nomination rejection in Supreme Court विषय पर आज सुबह तत्काल सुनवाई (urgent listing) होगी लेकिन सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अभी तक याचिका पेंडिंग दिखाई दे रही है। लेटेस्ट अपडेट मिलाई के सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आज सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। संभावना है कि कल शुक्रवार 12 जून को मामले की सुनवाई हो सकेगी।
Reasons for Meenakshi Natarajan's nomination disqualification in MP
यह पूरा विवाद तेलंगाना के पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ता ए. श्रीलता द्वारा हैदराबाद के चतुर्थ अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दायर एक निजी शिकायत (Private Complaint no 4472/2025) से जुड़ा है। इस शिकायत में नटराजन को प्रतिवादी नंबर 4 बनाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने मुख्य आरोपी (प्रतिवादी 1) पर छेड़छाड़ (molestation) के आरोप लगाए थे, जबकि मीनाक्षी नटराजन और अन्य पर वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारियों के रूप में बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया है। वर्तमान में नटराजन तेलंगाना कांग्रेस की अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) प्रभारी हैं।
Understanding Section 223 Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) notice
कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार, नटराजन को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 (Section 223 of the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) के तहत नोटिस प्राप्त हुआ है। इस प्रावधान के तहत, पार्टियों को सुने बिना किसी निजी शिकायत पर संज्ञान (cognizance) नहीं लिया जा सकता है। इसी के आलोक में, मजिस्ट्रेट ने नटराजन को यह स्पष्ट करने के लिए बुलाया था कि उनके खिलाफ आरोपी के रूप में संज्ञान क्यों न लिया जाए। कांग्रेस का तर्क है कि Section 223 BNSS notice against Meenakshi Natarajan केवल एक प्रारंभिक प्रक्रिया है और इसे अभी तक आधिकारिक आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।
Congress party stand on Representation of the People Act Section 33A
कांग्रेस पार्टी (INC) ने इस निरस्तीकरण के खिलाफ चुनाव आयोग का भी रुख किया है। पार्टी का मुख्य तर्क लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए (Section 33A of the Representation of the People Act) पर आधारित है, जिसके अनुसार उम्मीदवार को केवल उन्हीं मामलों का खुलासा करना अनिवार्य है जिनमें सजा 2 वर्ष से अधिक हो और जिनमें आरोप (charges) तय किए जा चुके हों। कांग्रेस का कहना है कि नटराजन को केवल अदालत में पेश होने का नोटिस मिला है और बिना संज्ञान (cognizance) के कानून की नजर में कोई आपराधिक मामला अस्तित्व में नहीं होता।
Legal implications of non-disclosure of criminal cases in election papers
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि disclosure of criminal cases in nomination papers तभी आवश्यक है जब कानूनी रूप से मामला एक निश्चित चरण तक पहुँच जाए। कांग्रेस के अनुसार, "मीनाक्षी नटराजन का नामांकन संज्ञान के अभाव के बावजूद खारिज कर दिया गया है, जिसका अर्थ है कि ऐसा कोई आपराधिक मामला था ही नहीं जिसका खुलासा किया जा सके"। धारा 33ए की प्रक्रिया को समझाते हुए पार्टी ने कहा कि संज्ञान के बाद जांच होती है और जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की जाती है, जो इस मामले में अभी तक नहीं हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस legal challenge over Meenakshi Natarajan’s disqualified candidacy पर क्या निर्णय लेता है।

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