भोपाल, 25 जून 2026: मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से मिलकर ठेकेदार केके सोहगौरा (ठेकेदार कृष्णकांत सोहगौरा) ने 55 करोड़ से ज्यादा का घोटाला किया है। ईडी की जांच में यह पाया गया है। इसके आधार पर ईडी द्वारा आगामी कार्रवाई की जा रही है।
रीवा और जबलपुर में सड़क निर्माण कार्यों में फर्जी बिल पेश कर सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED द्वारा करवाई की गई जिसमें 55.60 करोड़ रुपए के फर्जी बिल लगाकर सरकारी भुगतान लिया गया। रीवा और जबलपुर में की गई छापे की कार्रवाई के मामले में ईडी ने कहा है कि 19 जून को रीवा और जबलपुर जिलों में विभिन्न परिसरों सर्चिंग की गई। यह कार्रवाई सड़क निर्माण कार्यों में बिटुमिन से संबंधित फर्जी बिल पेश कर सरकारी भुगतान लेने के मामले में की गई। यह सर्चिंग मध्य प्रदेश की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) रीवा एवं जबलपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर PMLA 2002 के अंतर्गत की गई।
MPRRDA की रीवा और जबलपुर परियोजनाओं में भारी भ्रष्टाचार
ठेकेदार केके सोहगौरा और सहयोगियों के यहां सर्चिंग के दौरान ईडी की जांच में सामने आया कि ठेकेदारों ने मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (MPRRDA) की परियोजनाओं में अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत कर सड़क निर्माण में उपयोग किए जाने वाले बिटुमिन, अस्फाल्ट कार्यों के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए भुगतान पाया। इसके लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के नाम से जाली और मनगढ़ंत चालान बनाकर पेश किए गए।
55.60 करोड़ के फर्जी बिल लगाने का खुलासा
जांच में पाया गया कि करीब 55.60 करोड़ रुपए के फर्जी बिल लगाकर सरकारी धन का अवैध भुगतान प्राप्त किया गया, जिससे सरकारी राजकोष को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। तलाशी के दौरान संपत्ति संबंधी दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और 23.50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा 2.93 करोड़ रुपए की बैंक शेष राशि और सावधि जमा (एफडी) का भी पता लगाकर फ्रीज किया गया है।

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