भोपाल, 4 जून 2026: कोर्ट कचहरी की लम्बी लड़ाई के बाद जो कहानी सामने आई वो चौंकाने वाली है। एक वृद्ध व्यक्ति ने अपनी विधवा बहू से अंतिम सांस तक सेवा करवाई। ससुर के गुजर जाने के बाद बहू को पता चला कि ससुरजी ने तो 15 साल पहले ही किसी और को मकान बेच दिया था। खरीदने वाले के साथ डील हुई थी। मरने के बाद कब्जा क्लैम करेगा।
Family Property Dispute Surfaces After Father-in-Law’s Secret House Sale
मामले के अनुसार, 1990 वृृद्ध व्यक्ति ने अपना खेत और मकान 40 हजार रुपए में रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए बेच दिया था। डाक्यूमेंट्स में तो यह भी लिखा है कि रजिस्ट्री के साथ मकान का कब्जा भी खरीदार को सौंप दिया गया था लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं हुआ था। वृद्ध व्यक्ति अपनी विधवा बहू के साथ मकान में निवास कर रहा था और 2014 तक उसी मकान में रहा। उसी मकान में वृद्ध व्यक्ति का निधन भी हुआ।
वृद्ध व्यक्ति की मौत केे बाद भी खरीदार चुप रहा। कुछ दिनों बाद उसने विधवा बहू को मकान खाली करने के लिए कहा। बहू, स्वयं को एकमात्र उत्तराधिकारी मान रही थी। उसने मकान खाली करने से इंकार कर दिया और कचहरी में यह साबित करने की कोशिश की, कि उसने अपने ससुर की अंतिम समय तक सेवा की है। वो एकमात्र उत्तराधिकारी है और ऐसी किसी रजिस्ट्री की उसे जानकारी नहीं है। इसलिए इस रजिस्ट्री को शून्य घोषित किया जाए।
न्यायालय ने दस्तावेजों की जांच की तो पाया कि रजिस्टर्ड सेल डीड में 40 हजार रुपए के भुगतान और मकान का कब्जा सौंपने का स्पष्ट उल्लेख है। गवाहों के भी हस्ताक्षर हैं। इस आधार पर बहू के दावे को खारिज कर दिया गया।
जिस घर की उम्मीद में बहू ने दिनरात ससुर की सेवा की, शातिर ससुर ने उसी को धोखा दे दिया।

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